बाजार बागवानी प्यारी लाड़ हैगो त्वे संग मेरी जुनाली परानी तेरा संग मैं लै घुमनु बाजार बागवानी तेरी स्वानी-स्वानी मुखड़ी...
Poet
मेरे महबूब तेरी सूरत हजारों में एक मूरत नजाकत शोख बांकापन यही उसकी अदाएं हैं मेरे महबूब की सूरत... कभी...
चल चला चल तू चला चल जा चुका जो घर के अंदर उसकी मर्जी उसका करतब राह जो थामी थी...
तुम सुनो तो फिर से अपनी बात कर लें दिल के भीतर सिल चुके जज्बात कह लें मिट गये थे...
कलम खामोश कलम खामोश कर दी अब लगा कर रोप कर दी तब रखे थे जो तखत पर सब जला...
ये देवप्रयाग है, पूस की विदाई, माघ आया धूप, पौड़ी शिखरों को छोड़ प्रयाग निखर उठा है और हवाओं ने...
ऐसा तो कभी सोचा न होगा कितने अरमान होंगे मन में दबे, कितने सपने आंखों में बसे टूटकर चूर हो...
प्रदूषण है शैतान काला धुआँ, कूड़े के ढेर, सांसें रुके, दुखी है शहर। पानी गंदा, हवा भी भारी, प्रदूषण ने...
खून जब बहा धर्म के नाम कल पुलवामा आज पहलगाम, मचाया किसने ये कोहराम मची है चहुंदिश चीख पुकार, खून...
हादसों का दर्द यूं तो हररोज ही होते हैं हादसे हमारे आसपास रोज ही अखबारों की सुर्खियां होते हैं कुछ...
