ललित मोहन गहतोड़ी की कविता- मेरे महबूब की सूरत
मेरे महबूब तेरी सूरत
हजारों में एक मूरत
नजाकत शोख बांकापन
यही उसकी अदाएं हैं
मेरे महबूब की सूरत…
कभी जो राह चलता हूं
नजर वो खूब आती है
निगाहें फेर के देखो
वो कैसे मुस्कुराती है
यही उसका सलीकापन
मुझे नजदीक लाता है
मेरे महबूब की सूरत… (कविता जारी, अगले पैरे में देखिए)
अदाएं उसकी देखो तुम
गजब का सितम ढाती हैं
फिजाएं देख कर रंगीन
खुद ब खुद हो जाती हैं
मेरे इस सूने जीवन में
फिर रौनक भर आती है
मेरे महबूब की सूरत…
मेरी दुनिया में आकर वो
तरन्नुम खूब गाएगी
सच कहता हूं सुन लो तुम
वो एक दिन पास आएगी
कभी जब होगी मायूसी
वो हस हस खिल खिलाएगी
मेरे महबूब की सूरत…
कवि का परिचय
ललित मोहन गहतोड़ी काली कुमाऊं चंपावत से प्रकाशित होने वाली वार्षिक सांस्कृतिक पुस्तक फुहारें के संपादक हैं। वह जगदंबा कालोनी, चांदमारी लोहाघाट जिला चंपावत, उत्तराखंड निवासी हैं।
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