आंखों की प्यास सुआ आंखों की प्यास मेरा आंखों की प्यास तेरी मुखड़ी खास मेरी परानी आस मेरी फोटुक देखीलिए...
ललित मोहन गहतोड़ी
बाजार बागवानी प्यारी लाड़ हैगो त्वे संग मेरी जुनाली परानी तेरा संग मैं लै घुमनु बाजार बागवानी तेरी स्वानी-स्वानी मुखड़ी...
मैं हूं तेरा भगवान भगत निराश ना हो तू मन मन में मैं हूं तेरा.... मेरे लिए कड़वे वचन तू...
मेरे महबूब तेरी सूरत हजारों में एक मूरत नजाकत शोख बांकापन यही उसकी अदाएं हैं मेरे महबूब की सूरत... कभी...
चल चला चल तू चला चल जा चुका जो घर के अंदर उसकी मर्जी उसका करतब राह जो थामी थी...
कलम खामोश कलम खामोश कर दी अब लगा कर रोप कर दी तब रखे थे जो तखत पर सब जला...
दुखड़ा कभै मेरा दुखड़ा कभै मेरा कोई नै सुनैना द्वी बीसी पुरि है गई नै कोई बैऊना ईजु बौज्यु बुड़ा...
शप्थ चोट चड़ी चटक मार मौक मिलै फटक मार हटत छोड़ि झटक मार गमका आंसू गटक मार शान शौकत ठस्क...
ठगो नहीं... अच्हारे हर एक बेवस को।। टेक।। ठगो नहीं रे ठगव्वा लोग... हर एक बेवस को सबको ठग ठग...
बचो बचो अच्हारे कलयुग आ रौ छ।। टेक।। बचो बचो शहर के लोग... कलयुग रौ छ भ्राता सखा और बंधु...
