उत्तराखंड में एसआईआरः 99 फीसदी गणना फार्म डिजिटाइज, आम आदमी पार्टी ने नहीं किए एक भी बीएलए नियुक्त
उत्तराखंड में अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे ने शनिवार को सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में प्रेस काफ्रेंस कर प्रदेश में चल रहे मतदाता सूची के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड राज्य में एक जुलाई 2026 की अर्हता तिथि के आधार पर एसआईआर प्रक्रिया संपन्न की जा रही है। आठ जून से सात जुलाई तक प्रदेश में गणना पत्रों के वितरण और डिजिटाइजेशन का कार्य पूर्ण होना है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने राजनैतिक दलों को अवगत कराया कि प्रदेश में 79 लाख 60 हजार 762 मतदाताओं के सापेक्ष 71 लाख 16 हजार 650 मतदाताओं के फार्म डिजिटाइज कर दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 8 लाख 41 हजार 20 मतदाता “अनकलेक्टेड श्रेणी” में शामिल हैं। इसके अन्तर्गत 1 लाख 24 हजार 278 मृत, 4 लाख 79 हजार 762 स्थाई रुप से शिफ्ट, 61888 पहले से पंजीकृत, 1 लाख 66 हजार 741 अनुपस्थित और 8351 मतदाता अन्य कारणों से “अनकलेक्टेड श्रेणी” में शामिल हैं। इस प्रकार कुल 79 लाख 57 हजार 670 मतदताओं का डाटा और फार्म को डिजिटाइज कर दिया गया है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि 14 जुलाई 2026 को ड्राफ्ट रोल का प्रकाशन किया जाएगा इसके साथ ही 14 जुलाई से 13 अगस्त 2026 के बीच दावे एवं आपत्तियों को दर्ज करने का समय दिया गया है। उन्होंने बताया कि 14 जुलाई से 11 सितंबर 2026 तक नोटिस की अवधि एवं दावे आपत्तियों का निस्तारण किया जाएगा। अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 15 सितंबर 2026 को किया जाएगा। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने एसआईआर में राजनैतिक दलों से सहयोग की अपील की। उन्होंने सभी मान्यता प्राप्त राजनैतिक दलों से शत प्रतिशत बूथ लेवल एजेंट्स नियुक्त करने की अपील की। अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि वर्तमान में उत्तराखण्ड में 11733 पोलिंग बूथ के सापेक्ष वर्तमान में प्रदेश में राजनैतिक दलों द्वारा 23 हजार 102 बीएलए की तैनाती कर दी गई है। जिसमें बीजेपी द्वारा 11504, कांग्रेस पार्टी के 11105, सीपीआई (एम) के 378, बीएसपी के 115 एवं आम आदमी पार्टी ने एक भी बीएलए की नियुक्ति नहीं की है। ऐसे में साफ है कि बीजेपी और कांग्रेस ने ही चुनाव पूर्व मतदाता सूची की तैयारी में ज्यादा दिलचस्पी दिखाई है।
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