Loksaakshya Social

Social menu is not set. You need to create menu and assign it to Social Menu on Menu Settings.

Social menu is not set. You need to create menu and assign it to Social Menu on Menu Settings.

July 26, 2026

उत्तराखंड में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री हीरा सिंह बिष्ट का निधन, जानिए का राजनीतिक सफर, कार्यों का विवरण

उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री हीरा सिंह बिष्ट का शनिवार देर रात बाद हृदयघात के कारण निधन हो गया। वह सुबह निधन हो गया। वह करीब 85 साल के थे और लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। ईसी रोड स्थित एक अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन पर राजनीतिक, सामाजिक, कर्मचारी संगठनों के साथ ही आम नागरिकों ने गहरा दुख व्यक्त किया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

जीवन परिचय
3 नवंबर 1941 में जन्में हीरा सिंह सिंह बिष्ट के पिता स्वर्गीय खेम सिंह बिष्ट थे। देहरादून में जन्में हीरा सिंह बिष्ट शैक्षणिक रूप से पोस्ट ग्रेजुएट (स्नातकोत्तर) थे। देहरादून में डीएवी पीजी कालेज छात्रसंघ अध्यक्ष से उन्होंने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। वह उत्तराखंड के वरिष्ठ कांग्रेस नेता थे और उन्होंने एन.डी. तिवारी सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे। हीरा सिंह बिष्ट प्रदेश की राजनीती में लम्बे समय तक सक्रीय रहे। वह ईमानदारी व सफगोई के लिए जाने जाते रहे। पारिवारिक जनों के अनुसार उनका अंतिम संस्कार आज रविवार को नालापानी चौक श्मशान घाट पर किया जायेगा। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

कई महत्वपूर्ण पदों की उठाई जिम्मेदारी
वह उत्तराखंड राज्य के गठन से पहले और बाद में प्रदेश कांग्रेस संगठन में महत्वपूर्ण पदों पर रहे। हीरा सिंह बिष्ट उत्तराखंड के एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री थे। उन्होंने डोईवाला विधानसभा क्षेत्र से तीन बार विधायक के रूप में प्रतिनिधित्व किया तथा एन.डी. तिवारी के मंत्रिमंडल में परिवहन, श्रम और तकनीकी शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली। इंटक (INTAC) कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में श्रमिकों व मजदूरों के हितों की आवाज उठाई। खेलकूद के विकास में भी उनकी सक्रिय रुचि रही और वे उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन के संस्थापक सदस्यों में शामिल थे। अपने राजनीतिक प्रयासों से रायपुर क्रिकेट स्टेडियम के लिए भूमि आवंटन में अहम भूमिका निभाई। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

छात्र जीवन से ही की सक्रिय राजनीति
हीरा सिंह बिष्ट का राजनीतिक करियर में छात्र जीवन से लेकर ब्लॉक प्रमुख समेत उत्तर प्रदेश के समय से पूरे देहरादून शहर के विधायक के रूप में उपलब्धि है। राजनीतिक जानकार कहते हैं कि हीरा सिंह बिष्ट अपने दौर के छात्र नेताओं में सबसे तेजतर्रार और प्रभावशाली नेता रह चुके हैं। उनके बारे में बताया जाता है कि वह देहरादून डीएवी कॉलेज के ऐसे छात्र नेता थे, जिनकी सीधे इंदिरा गांधी से बातचीत थी। हीरा सिंह बिष्ट बताते थे कि वह इंदिरा गांधी के आशीर्वाद से ही चुनावी मैदान में उतरे थे और जीत हासिल की थी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

राजनीति के खिलाड़ी
हीरा सिंह बिष्ट उत्तराखंड में ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के दौर से ही राजनीति में माहिर खिलाड़ी रहे हैं और उन्होंने अब तक कभी भी किसी भी तरह की विषम परिस्थितियों में कांग्रेस का साथ नहीं छोड़ा है। वह इंदिरा गांधी के दौर में राजनीति में आए। उस समय वह छात्र जीवन में थे और छात्र नेता के रूप में खुद इंदिरा गांधी के आशीर्वाद से उन्होंने अपनी राजनीति की शुरुआत की थी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

चुनावी राजनीति के डेब्यू में हारे, फिर हरबंश कपूर को दी थी मात
उन्होंने 1977 में अपना चुनावी राजनीतिक डेब्यू किया। 1977 में उन्होंने टिहरी गढ़वाल की लोकसभा सीट से सांसद चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। इसके बाद हीरा सिंह बिष्ट ने 1985 में देहरादून शहर की विधानसभा सीट से कांग्रेस के निशान पर चुनाव लड़ा और भाजपा के हरबंस कपूर को हराया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

राजनीतिक सफर
हीरा सिंह बिष्ट ने तीन बार जीत का स्वाद चखा। वर्ष 1977 और 1998 में टिहरी सीट से एमपी की चुनाव लड़े और हार गए। इसके बाद 1985 में देहरादून विधानसभा सीट से विधायक बने, 2002 में रायपुर विधानसभा से चुनाव जीते। इसके बाद राजपुर सीट से 2007 का चुनाव हारने के बाद 2012 में डोईवाला विधानसभा से चुनाव लड़े और हार गए। इस सीट से डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक चुनाव जीते और इसके बाद उन्होंने लोकसभा का चुनाव जीता तो इस्तीफा दिया। फिर 2014 में डोईवाला सीट पर उपचुनाव में हीरा सिंह बिष्ट ने त्रिवेंद्र सिंह रावत को हराया। वर्ष 2017 का चुनाव हीरा सिंह बिष्ट त्रिवेंद्र सिंह रावत से हार गए थे। वहीं, 2022 के चुनाव में वह रायपुर विधानसभा सीट से बीजेपी के उमेश शर्मा काऊ से चुनाव हार गए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

याद किया जाएगा इन कार्यों के लिए
– रायपुर में भव्य स्टेडियम का निर्माण के लिए भूमि आवंटन का कार्य अविभाजित उत्तर प्रदेश के विधायक पद पर 1985-90 अवधि में कराया था। इसका भव्य निर्माण राज्य बनने के बाद कांग्रेस सरकार में मंत्री पद पर रहते हुए कराया गया।
-राजीव गांधी नवोदय विद्यालय तपोवन रोड नालापानी में जहां सीबीएसई पद्धति से निशुल्क शिक्षा 6 से 12 कक्षा तक दी जाती है, इसकी स्थापना कराई।
-पर्यटन स्थल सहस्रधारा का सफर सुगम कराते हुए बस सेवा के साथ साथ देश के पर्यटन स्थल के रूप में विकसित कराया तथा हैलीपैड को भी जमीन उपलब्ध कराई।
-सहस्रधारा रोड पर डांडालखौंड में आईटीपार्क स्थापना कर बेरोजगारों को रोजगार उपलब्ध कराया।
-1814 के द्वितीय विश्वयुद्ध, जो नालापानी में खलंगा युद्ध के नाम से जाना गया गोरखा स्मारक स्थापित कराया तथा केन्द्रीय वन विभाग की अनुमति से सड़क निर्माण कराया गया। जहां प्रतिवर्ष मेले का आयोजन किया जाता है।
-प्रदेश के मुख्य कार्यालयों की स्थापना रायपुर विधान सभा क्षेत्र के अन्तर्गत कराई गई । इनमें नालापानी में शिक्षा निदेशालय, पीआरडी, एनसीसी, समाज कल्याण की स्थापना कराई गई।
-राजकीय इण्टर कालेज नालापानी, गुजराड़ा व माल देवता से सहस्रधारा को जोड़ने वाली सड़क व पुल का निर्माण कराया गया।
-गुजराड़ा से शिमला, चण्डीगढ़, जयपुर दिल्ली के लिए बस सेवा प्रारम्भ कराई गई। 800 नई बसों तथा बोल्वो बसों की व्यवस्था करके प्रदेश एवं दूसरे राज्यों की जनता के आवागमन हेतु पूरे जनपदों एवं मुख्यालयों के लिए बस सेवा तथा प्रदेश की राजधानी से दूसरे प्रदेश लखनऊ, जयपुर, चण्डीगढ एवं शिमला आदि की बस सेवा संचालित कराते हुए जनता के लिए आवागमन सुलभ कराया गया।
-कर्मचारी हितों में कर्मकार बोर्ड, चीनी मिल कर्मचारियों को वेजवोर्ड का लाभ, दिलाया गया।
नोटः सच का साथ देने में हमारा साथी बनिए। यदि आप लोकसाक्ष्य की खबरों को नियमित रूप से पढ़ना चाहते हैं तो नीचे दिए गए आप्शन से हमारे फेसबुक पेज या व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ सकते हैं, बस आपको एक क्लिक करना है। यदि खबर अच्छी लगे तो आप फेसबुक या व्हाट्सएप में शेयर भी कर सकते हो। यदि आप अपनी पसंद की खबर शेयर करोगे तो ज्यादा लोगों तक पहुंचेगी। बस इतना ख्याल रखिए।