October 16, 2021

Lok Saakshya

Jan Jan Ki Awaj

साहित्य जगत

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मन चलो करो सीमोल्लंघन। बिन छोड़े मर्यादा बन्धन।। अतल गगन का है आमन्त्रण। नव नवल क्षितिज का आकर्षण।। अज्ञात पंथ...

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माँ कालिंका मेरि बड्यर्यूं कि कालिंका माँ, दैंणी ह्वेकि जै. आस लेकि- औंला हम, माँ- खुसी देकि जै.. तेरा थानम...

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रिस्ता-नाता नाता- रिस्तौं कु, कनु- अलबेलु सफर चा. गौं- परिवारम, नाता- रिस्तौं झर- फर चा.. ब्वे-बुबा-ब्वाडा- भै-भैंणा, रैं- सदनि बड़ा,...

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करम करिल्या-भला करम, नि करा-खटकरम भयो. गरीब- गुरबौ मदद कनुबि, हमरु- धरम भयो.. बड़ा-बड़ा तिलक लगै, पूजापाठ करै क्य होलु,...

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कासी-कोत्वाळ कासि कु- कोत्वाळ बड़ि कन डरांद जिंदगी. सयूं-सयूं धरु-धरु लिजै, कन रुलांद जिंदगी.. आज कु दिन-कनु कटे, भोळ की...