ललित मोहन गहतोड़ी की कुमाऊंनी कविता- आंखों की प्यास
आंखों की प्यास
सुआ आंखों की प्यास
मेरा आंखों की प्यास
तेरी मुखड़ी खास
मेरी परानी आस
मेरी फोटुक देखीलिए
ना लागो उदास
आंखों की प्यास…
आंखा बंद करि देखछू
कति लागछि पास
तेरी गोरी-गोरी मुखड़ी
लागछि झक्कास
आंखों की प्यास… (कविता जारी, अगले पैरे में देखिए)
जब मेरी याद आली
फोन करि लिए बात
घुघुति की घुर सुनि
ना लागो निश्वास
आंखों की प्यास…
ड्यूटी पल्टन सुआ
लेई लद्दाख़
याद तेरि ऊछि बलि
झट ऊलो पास
आंखों की प्यास…
रचनाकार का परिचय
ललित मोहन गहतोड़ी उत्तराखंड में काली कुमाऊं चंपावत से प्रकाशित होने वाली वार्षिक सांस्कृतिक पुस्तक फुहारें के संपादक हैं। वह जगदंबा कालोनी, चांदमारी लोहाघाट जिला चंपावत, उत्तराखंड निवासी हैं।
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Bhanu Bangwal
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मेल आईडी-bhanubangwal@gmail.com
भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।


