मेरे महबूब तेरी सूरत हजारों में एक मूरत नजाकत शोख बांकापन यही उसकी अदाएं हैं मेरे महबूब की सूरत... कभी...
Lalit Mohan Gahtori
चल चला चल तू चला चल जा चुका जो घर के अंदर उसकी मर्जी उसका करतब राह जो थामी थी...
तुम सुनो तो फिर से अपनी बात कर लें दिल के भीतर सिल चुके जज्बात कह लें मिट गये थे...
कलम खामोश कलम खामोश कर दी अब लगा कर रोप कर दी तब रखे थे जो तखत पर सब जला...
दुखड़ा कभै मेरा दुखड़ा कभै मेरा कोई नै सुनैना द्वी बीसी पुरि है गई नै कोई बैऊना ईजु बौज्यु बुड़ा...
शप्थ चोट चड़ी चटक मार मौक मिलै फटक मार हटत छोड़ि झटक मार गमका आंसू गटक मार शान शौकत ठस्क...
ठगो नहीं... अच्हारे हर एक बेवस को।। टेक।। ठगो नहीं रे ठगव्वा लोग... हर एक बेवस को सबको ठग ठग...
बचो बचो अच्हारे कलयुग आ रौ छ।। टेक।। बचो बचो शहर के लोग... कलयुग रौ छ भ्राता सखा और बंधु...
अच्हारे लड़कों कलयुग भाई क्यों बैरी।। टेक।। कैसी अधर्म की जीत...लड़को कलयुग भाई क्यों बैरी बचपन में तब लाड़ से...
घूंघट बीच दो नैना चलकी अंगिया पटकी सलुआ झलकी काली गोरी बाकि छोरी।। 2।। नैना मारे झप झप की घूंघट...
