अशोक आनन की कविता- भोर का शोर
भोर का शोर।
मचा चहुं ओर।
टूट अब गई
नींद की डोर।
कलरव का अब
रहा ना दौर।
ज़िंदगी चली
सांझ की ओर।
घिरा अभी भी
तमस घनघोर। (कविता जारी, अगले पैरे में देखिए)
हाथ आए न
किरण का छोर।
धूप का कहीं
दिखे न ठौर।
पेट में घुसा
भूख़ का कौर।
वक़्त भी हुआ
अब चुगलखोर।
कवि का परिचय
अशोक आनन
जूना बाज़ार, मक्सी जिला शाजापुर मध्य प्रदेश।
Email : ashokananmaksi@gmail.com
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