कई रोगों की जड़ है रात का भोजन, स्वस्थ रहने के लिए करें ये उपाय
एक सवाल ज्यादा पूछा जाता है कि क्या रात को भोजन स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है। इसके जवाब में तो एक्सपर्ट ये ही बताते हैं कि रात का भोजन (विशेषकर देर रात) कई बीमारियों को जन्म देता है। ऐसे में रात के समय भोजन करने से बचना चाहिए। यदि भोजन करो तो पेट में ठूस ठूस कर ना खाएं। आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा दोनों ही इस बात की पुष्टि करते हैं कि देर रात और भारी भोजन करना कई गंभीर बीमारियों जैसे मोटापा, डायबिटीज और पाचन समस्याओं की जड़ बन सकता है। कारण ये है कि रात का भारी भोजन और देर से खाना पाचन तंत्र की कार्यप्रणाली को धीमा कर देता है। इससे भोजन ठीक से पच नहीं पाता। इसके कारण पेट में विषैले पदार्थ बनते हैं, जो शरीर में कई बीमारियों की जड़ बन सकते हैं। पहले हम जानते हैं कि देर रात को भोजन करने से किस तरह की समस्या पैदा होती हैं। साथ ही इसके कारणों पर भी चर्चा करेंगे। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
पाचन और एसिडिटी की समस्या
रात में शरीर की पाचन क्रिया कमजोर हो जाती है। भारी खाना खाने से पेट में गैस, अपच, और एसिडिटी (Acid Reflux) की समस्या होती है। लेटने पर छाती में जलन (Heartburn) भी बढ़ सकती है।
मोटापा और फैटी लिवर
रात को सोने से पहले खाया गया भोजन ठीक से ऊर्जा में नहीं बदल पाता। साथ ही अतिरिक्त कैलोरी फैट के रूप में जमा होने लगती है। इससे वजन बढ़ता है और फैटी लिवर का खतरा रहता है।
खराब नींद
पाचन तंत्र को काम करने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जिससे शरीर को आराम या रिपेयर का समय नहीं मिल पाता। इससे नींद में खलल पड़ता है।
गंभीर बीमारियों का जोखिम
आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, लंबे समय तक यह आदत मेटाबॉलिक सिंड्रोम को जन्म दे सकती है, जो टाइप-2 डायबिटीज, हृदय रोग (CVD),हाई ब्लड प्रेशर का कारण बन सकता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
रात के भोजन से होने वाले रोगों का कारण
धीमी पाचन अग्नि
सूर्यास्त के बाद पाचन शक्ति (पाचन अग्नि) कमजोर हो जाती है। इससे भारी भोजन ठीक से नहीं पच पाता।
टॉक्सिन्स (आम) का निर्माण
बिना पचा हुआ भोजन पेट में सड़ने लगता है, जिससे ‘आम’ नामक विषैले पदार्थ बनते हैं। ये शरीर में फैलकर बीमारियों को जन्म देते हैं।
मेटाबॉलिज्म धीमा होना
रात में शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है, जिससे अतिरिक्त कैलोरी ऊर्जा में बदलने के बजाय फैट के रूप में जमा होने लगती है।
हार्मोनल असंतुलन
देर रात खाने से इंसुलिन और ब्लड शुगर का स्तर प्रभावित होता है, जिससे टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ता है।
नोटः ये लेख सामान्य जानकारी प्रदान करता है, यदि किसी को ज्यादा दिक्कत हो तो चिकित्सक से तुरंत संपर्क करें। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इन बीमारियों से बचने के उपाय
समय: रात का भोजन सूर्यास्त के आसपास (शाम 7:00 बजे से 8:00 बजे के बीच) कर लेना चाहिए। सोने और खाने के बीच कम से कम 2-3 घंटे का अंतर रखें।
मात्रा और गुण: रात का भोजन हल्का, पौष्टिक और आसानी से पचने वाला होना चाहिए। जैसे- दलिया, सूप, या उबली हुई सब्जियां।
भोजन के चुनें ये विकल्पः रात को भारी खाना, मैदा और ज्यादा मीठे से बचें। इसके बजाय हरी सब्जियां और सूप जैसे सुपाच्य विकल्प चुनें।
सही समय पर का चयनः सूर्यास्त शाम 7:00 से 7:30 बजे तक के आसपास भोजन करना सबसे अच्छा होता है।
सोने में अंतर: रात के खाने और सोने के बीच कम से कम 2 से 3 घंटे का अंतराल होना चाहिए, ताकि खाना अच्छी तरह पच सके।
हल्का भोजन करें: रात का खाना हमेशा हल्का होना चाहिए।
भारी चीजों से परहेज: रात में भारी खाना, जैसे- मैदा, चीज़, ज्यादा तेल-मसाले, और मांसाहारी भोजन से बचें।
कच्चे सलाद और फाइबर: रात में आप उबली हुई सब्जियां या हल्का सूप शामिल कर सकते हैं
चबा-चबा कर खाएं: भोजन को हमेशा अच्छी तरह चबाएं। इससे पाचन एंजाइम सक्रिय हो जाते हैं और पेट फूलने या गैस की समस्या नहीं होती।
वज्रासन में बैठें: खाना खाने के बाद 10-15 मिनट के लिए वज्रासन में बैठें, यह पाचन क्रिया को तेज करता है।
हल्की सैर: डिनर के बाद 15-20 मिनट की धीमी वॉक (हल्की सैर) जरूर करें, इससे एसिडिटी की समस्या दूर होती है।
सोने से ठीक पहले दूध या फल: रात को सोने से तुरंत पहले फ्रूट-शेक्स या भारी दूध पीने से बचें, क्योंकि ये पेट में गैस और अपच बना सकते हैं।
कैफीन और अल्कोहल: रात में सोने से पहले चाय, कॉफी, या शराब के सेवन से बचें। यह पाचन और नींद दोनों को प्रभावित करते हैं।
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Bhanu Bangwal
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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।



