मेरे डांडो - कांठों में आजकल सुरभित पुष्प खिले हैं। बांज बुरांश मौरू तरुवर, शांत स्निग्ध हरितपर्ण धरे हैं। प्रिय...
कविता
यार फकीरी में मजा है.... यार फकीरी में मेरे दिलss मेरे दिलss मेरे दिल मेरे दिल मेरे दिल यार फकीरी...
लेखक ने करीब 60-62 वर्ष पूर्व बच्चों की पत्रिका "चन्दामामा" में एक कहानी पढ़ी थी। लेखक का नाम याद नहीं।...
कुछ बाते हैं जज्बातो की चलो आज कहती हूँ एक किरदार जो खास हम सबके लिए चलो आज उसके बारे...
चाणक्यवाद के लक्षण सब लगे राजनीति की धींगा- कुश्ती में, सब लगे राजनीति की नूरा- कुश्ती में। सब लगे राजनीति...
आया वसंत आया वसंत, आया वसंत । है चहुं ओर, छाया वसंत ।। मोहक है, माया वसंत । आया वसंत,...
सूखे पत्ते कहते हैं सूखे पत्ते कहते हैं, सूख गया सो झड़ गया, अपनो से बिछड़ गया, पतझड़ के मौसम...
कद्र उसी की है जग में, जिसके मुंह पर खुशबू हो ! देवभूमि का रहने वाला हूं ! कभी पक्षपात...
बदला क्या है? बदला क्या है? कुछ भी तो नही! वही फीके चेहरे, वही तीखे तेवर, वही दिखावटी रिश्ते, वही...
फागुनी बयार आ गई है ऋतु सुहानी, वसंती बयार लेकर। फागुनी कोमल पवन वह, हाथ फेरे सिर पे सर सर।...
