पेड़ के बजाय जमीन पर रहता है ये पक्षी, सोता है आसमान की तरफ पैर करके, शिकारी को देता है चकमा, मादा को रिझाने को दिखाता है करतब
इस धरती पर कई तरह के पशु, पक्षी होते हैं। इंसान की तरह ही इनमें अलग अलग गुण होते हैं। कहावत है कि अगर ये पक्षी बोलता हुआ भी निकल जाए, तो उसे अशुभ माना जाता है। कहा जाता है कि इस पक्षी को पहले से ही कुछ खराब होने का आभास हो जाता है, जिसकी वजह से वह उस इलाके में घूमने लगता है, जहां कोई अनहोनी होने वाली है। वहीं, इस पक्षी में शिकारी को चकमा देने की बुद्धि है, तो वह पेड़ पर नहीं सोता है। सोते हुए भी इसकी हरकत अजीबो गरीब होती है। इस पक्षी का नाम है टिटहरी। टिटहरी आकार के जलचर पक्षी होते हैं, जिनका सिर गोल, गर्दन व चोंच छोटी और पैर लंबे होते हैं। जीववैज्ञानिक रूप से इसकी जातियाँ स्कोलोपसिडाए नामक कुल में संगठित हैं। यह प्राय: जलाशयों के समीप रहती है। इसे कुररी भी कहते हैं। आज हम इसकी खासियत के बारे में बताने जा रहे हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
अलग अलग नाम से जाना जाता है टिटहरी
टिटहरी को इसे ‘टिटोनी’ के नाम से भी जाना जाता है। बुंदेलखंड में ‘किलकिला’ पक्षी के नाम से भी जाना जाता है। लोकल भाषा किलकिल का मतलब लड़ाई-झगड़े से है। यह पक्षी हुटिटी टी, हुटिटी टी , हुटिटी टी बोलते हुए निकलते हैं। आवाज इतनी तेज होती है कि दूर-दूर तक सुनाई देती है। टिटहरी एक ऐसा अनोखा पक्षी है जो उड़ता कम है यह अपना अधिकांश समय तालाब और झीलों के नजदीक गुजारता है। भारत के सभी प्रदेशों में टिटहरी पाई जाती है। इसका अंग्रजी नाम ‘लेपविंग’ है। भारत में इसकी 2-3 प्रजातियां ही पाई जाती है । (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
टिटहरी का रंग
टिटहरी का आकार प्रकार कुछ कुछ बगुले से मिलता जुलता होता है। गर्दन बगुले से छोटी होती है। सिर और गर्दन के ऊपर की तरफ और गले के नीचे का रंग काला होता है। इसके पंखों का रंग चमकीला कत्थई तथा सिर गर्दन के दोनों ओर एक सफेद चैड़ी पटटी होती है। टिटहरी की दोनों आंखों के सामने एक गूदेदार रचना पाई जाती है। इस रचना को देखकर यह पक्षी दूर से ही पहचान लिया जाता है। टिटहरी की दूसरी प्रजाति में आंखों के पास पाई जाने वाल यह रचना पीले रंग की गूदेदार होती है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
टिटहरी का आकार
टिटहरी पक्षी की लम्बाई 11-13 इंच एवं पंखों का फैलाव 26-34 इंच होता है। इसका शरीरिक भार लगभग 128-330 ग्राम पाया गया है। इसके पंख गोलाकार होते हैं तथा सिर पर एक उभरा भाग होता है, जिसे क्रेस्ट कहते हैं। इसकी पूंछ छोटी एवं काली होती है, जिसकी लम्बाई लगभग 104-128 मि.मी. पाई गई है। इनके चोंच की लम्बाई लगभग 31-36 मि.मी. देखी गई है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
निवास स्थान
टिटहरियाँ पानी और खेतों के आसपास खुले और सूखे समतल इलाकों, ताजे पानी की दलदल, झीलों के दलदली किनारों, जुते खेतों तथा रेतीले या कंकरीले नदी के तटों में भी पाई जाती हैं। पीले गलचर्म वाली और झुंड में रहने वाली टिटहरियाँ शुष्क आवास पसंद करती हैं, जबकि लाल गलचर्म वाली टिटहरियाँ पानी से निकटता और उभरे पंख वाली टिटहरी या तटीय टिटहरी, जलासिक्त क्षेत्र में ही रहती है। इस श्रेणी के जलचर पक्षियों के शरीर और पैर लम्बे, एवं पंख संकीर्ण होते हैं। अधिकांश प्रजातियों के चोंच संकीर्ण होते है, लेकिन उनके आकार और लम्बाई में काफी विविधता होती है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
पेड़ पर नहीं बैठता है ये पक्षी, घोंसला भी जमीन पर
टिटहरी जमीन पर घोंसला बनाने की आदत और मानसून की भविष्यवाणी करने के लिए प्रसिद्ध है। ये धरती पर मामूली सा खोदकर अथवा थोड़े से कंकरों और बालू से घिरे गढ्डे में घोंसला बनाते हैं। इनका प्रजनन बरसात के समय मार्च से अगस्त के दौरान होता है। ये सामान्यत: दो से पांच नाशपाती के आकार के (पृष्ठभूमि से बिल्कुल मिलते-जुलते, पत्थर के रंग के हल्के पीले पर स्लेटी-भूरे, गहरे भूरे या बैंगनी धब्बों वाले) अंडे देती हैं। यह पेड़ पर नही बैठते है। मादा टिटहरी 4 अण्डें देती है एवं इनसे 28 से 30 दिनों में बच्चे निकल आते हैं। दोनो मादा एवं नर अण्डों की देखभाल एवं सेने का काम करते हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
टांग आकाश की तरफ करके सोती हैं टिटहरी
जमीन पर बनाए गए घोंसले में टिटहरी चिड़िया टांग आकाश की तरफ उठा कर सोती हैं। कहावत है कि ये सोचती हैं कि आकाश उसी के कारण टिका है। एक कहावत यह कि टिटहरी को हमेशा लगता है कि उसकी टांग हटी कि आसमान गिरा। इसका कोई वैज्ञानित प्रमाण नहीं है। बुजुर्गों के अनुसार उनका कई वर्षो का अनुभव कहता है कि जिस वर्ष टिटहरी जितने मात्रा में अंडे देती है उतने माह तक भरपूर बारिश होती है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
शिकारी को देती हैं चकमा
यह पक्षी कभी पेड़ पर नहीं बैठता। हमेशा जमीन पर रहता है और खतरा महसूस होने पर आक्रामक होकर रक्षा करता है। जमीन पर अंडों और बच्चों की रक्षा करने के लिए ये पक्षी शिकारी जैसे कुत्ते और अन्य जंगली जानवरों का उस स्थान से ध्यान भटकाता है, जहां घोसला होता है। ये पक्षी घोसले से दूर जमीन के पास ऐसे फड़फड़ता है कि शिकारी को लगे कि उसके पंख टूट गए और वह घायल है। जैसे ही शिकारी उसके निकट पहुंचता है तो वह कुछ ऊंचाई से उड़ते हुए और तेज आवाज से साथ उसे अपना पीछा कराते हुए घोसले से दूर ले जाता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
मनमोजी और चौकन्ना पक्षी
टिटहरी एक मनमोजी पक्षी है। इसे खुला स्थान, जहां कीड़े मकोड़े खाने को मिले, वहीं रहना पसंद है। टिटहरी एक चैकन्ना और चालाक पक्षी है। ये अपने नजदीक आने वाले जानवर (कुत्ते एवं बिल्ली इत्यादि), मनुष्य को देखकर शोर मचाना शुरू कर देता है। टिटहरी दिन रात जाग कर अपने अंडों और बच्चों की देखभाल करता है। टिटहरी मार्च से अगस्त महीने के बीच 2-3 या 4 अंडे देती है। टिटहरी के अंडों का रंग मिटटी से मिटटी के रंग से मिलता जुलता होता है। इसलिए लोगों की नजर इनके अंडों पर नहीं पड़ती है। टिटहरी के बच्चों का रंग भी धरती के रंग जैसा ही होता है। मादा टिटहरी और नर टिटहरी दोनों मिलकर बच्चों का पालन पोषण करते हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
ये हैं भ्रांतियां
ऐसी भ्रांतियां भी हैं कि अगर यह पक्षी किसी की घर के ऊपर से बोलता हुआ निकल जाए, तो यह तय माना जाता है कि उसके घर में वाद-विवाद, कहा-सुनी, लड़ाई-झगड़ा, कुछ ना कुछ जरूर होगा। अगर यह पक्षी बार-बार किसी मोहल्ले या गांव में घूम रहा है और हफ्ता 10 दिन ऐसे ही करता रहा, तो फिर बड़ी अनहोनी यानी कि किसी की मौत की खबर भी किसी न किसी कारण से आ जाती है। हालांकि इस बात के कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
मादा को रिझाने के लिए दिखाता है करतब
नर अपनी मादा को हवाई करतबों से रिझाता है। इनमें उड़ान के बीच में द्रुत चढ़ाव, पलटे और चक्कर होते है। यह तेज़ चक्करों, हिचकोलों और लुढ़कन भरी उड़ान है। इसमें कुछ अंतराल पर पंख फड़फड़ाने की आवाज ऊंची दूरी तक सुनाई देती है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
ऐसे तलाशती हैं भोजन
भोजन की तलाश में टिटहरियाँ छोटी-छोटी दौड़ भरती हैं। रुककर, सीधी खड़ी हो जाती हैं और फिर झुककर शिकार चोंच में ले जाती हैं। इनकी उड़ान तेज़, शक्तिशाली, सीधी और सधी हुई होती है। इनके भोजन में मोलस्क, कीड़े कृमियों और अन्य छोटे रीढ़हीन जंतुओं के साथ-साथ नरम कीचड़ से बनी हुई वनस्पतियाँ भी होती हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
टिटहरी पक्षी की मुख्य खासियत
जमीन पर बसेरा: टिटहरी कभी पेड़ों पर घोंसला नहीं बनाती, बल्कि जमीन पर छोटे गड्ढों में अंडे देती है।
मौसम की भविष्यवाणी: ग्रामीण क्षेत्रों में यह माना जाता है कि अगर टिटहरी ऊंचे स्थान पर अंडे दे तो अच्छी बारिश होगी। यदि समतल जमीन पर दे तो कम बारिश होगी।
अनोखी आवाज: यह बहुत तेज आवाज में बोलती है, जिसे अक्सर “क्या-उसने-यह-किया” (did-he-do-it) जैसा सुना जाता है।
अंडे की सुरक्षा: मान्यता है कि यह अपने अंडों की सुरक्षा के लिए चोंच में पारस पत्थर रखती है (यह केवल लोक मान्यता है)।
पानी से प्यार: यह पक्षी जलाशयों, खेतों और नदियों के किनारे रहना पसंद करती है और अपने पंखों को पानी में भिगोकर बच्चों को ठंडक पहुंचाती है।
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Bhanu Bangwal
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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।


