हिन्दी राष्ट्रवाद के हर पन्ने पर, हिन्दी का साम्राज्य हो । भटक रही पहचान हमारी, उठो उसका सम्मान हो ।।...
कविता
तपोवन की व्यथा जिन बर्फ की चोटियों का दीदार करने, सैलानी आते थे यहाँ सैर करने। डर रहे हैं काँप...
क्यों राष्ट्र के भक्षक-रक्षक से पराक्रम का प्रमाण माँगते हैं, संविधान प्रदत्त अभिव्यक्ति की सारी सीमायें लाँघते हैं।। जला रहे...
अगर कभी-भी नहीं मिले तो अगर कभी कुछ कहा नहीं तो - बात कैसे है ? अगर कभी कुछ सुना...
कह रहा हिमालय अब भी समय है कह रहा हिमालय अब भी समय है, जागो - जागो देर न हो...
देख तबाही के मंजर को, व्यथित हृदय क्यों टूट रहा ! धरती माता की चीखों से, नील नलय तक सिहर...
बदलते रिश्ते आधुनिक युग में अब कलयुग का कहर है जिसका भी तुम भला करना चाहो उसकी सोच में ही...
रेलगाड़ी की बर्थ का सन्देश तीन शून्य एक शून्य एस दो की पन्द्रह हूँ। खाली नहीं कभी रहती जो बर्थ...
यदि स्वर्ग का सुख पाना है, तो राजनीति में आना। सुख -सत्ता सिंहासन को, हरगिज नहीं खोने देना। राजनीति से...
गांधी जी की पुण्यतिथि पर कितने अच्छे, कितने प्यारे। मेरे बड़े निराले थे बाबू। जो कहते कर के दिखलाते थे,...
