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August 11, 2026

शिक्षक ख्याली दत्त का हिंदी प्रेम, कविता में कुछ इस तरह किया बयां

शिक्षक ख्याली दत्त का हिंदी प्रेम, कविता में कुछ इस तरह किया बयां।

हिन्दी
राष्ट्रवाद के हर पन्ने पर,
हिन्दी का साम्राज्य हो ।
भटक रही पहचान हमारी,
उठो उसका सम्मान हो ।।

अपनी हर पहचान है हिन्दी,
हिन्दी ही स्वाभिमान है ।
अहिंसा का पाठ पढा़ती ,
हिन्दी एक वरदान है ।।

आदर और सम्मान रसित है,
धर्म कर्म की सीख भरी ।
ऐसी संजीवनी हिन्दी अपनी ,
किसने हमसे दूर करी ।।
इस माटी के हर एक कण में ,
हिन्दी का अधिकार है ।
आंग्लभाषा को सिर में रखा ,
यह तो अत्याचार है ।।

रीति-रिवाज संस्कार है,
हिन्दी कर्तव्य कर्म संयोग है ।
गृहस्थी की पावन गंगा है ,
जग तारण यह जोग है ।।

हर दिल पर हर पन्ने पर हो ,
हर होडिंग हर मंचों पर ।
नई उड़ानें भर भर करके,
भारत का भ्रमण तो कर ।।

मृत पडी़ हर उर में जिन्दा ,
हम करने को आये हैं।
जय हिन्दी जय भारत तेरी,
एक दीप जलाकर लाये हैं ।।

कवि का परिचय
नाम-ख्याली दत्त
सहायक अध्यापक
राजकीय प्राथमिक विद्यालय सकनणा,
ब्लॉक सल्ट, जनपद अल्मोड़ा, उत्तराखंड