Loksaakshya Social

Social menu is not set. You need to create menu and assign it to Social Menu on Menu Settings.

Social menu is not set. You need to create menu and assign it to Social Menu on Menu Settings.

September 25, 2026

अब आएगी सर्दी, ऐसे में थाली में बदलाव पर रखें विशेष ध्यान, शरीर रहेगा गर्म

अक्टूबर माह से हल्की सर्दी दस्तक दे सकती है। नवंबर माह तक तो मौसम में एक अलग सी ठंडक घुलने लगती है। सुबह और शाम की गुलाबी सर्दी यह याद दिलाने लगती है कि अब गर्म कपड़ों के साथ-साथ हमारी थाली में भी बदलाव का वक्त आ गया है। इस मौसम में अगर सही खानपान रखा जाए, तो शरीर अंदर से मजबूत रहता है और कड़ाके की ठंड से भी बचाव होता है। सर्दियों में शरीर को अंदर से गर्म रखने और ठंड से बचने के लिए गर्म तासीर (warm potency) वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए। यदि आप भी इस मौसम में अपने आप को स्वस्थ रखना चाहते हैं, तो इस स्टोरी को पूरा पढ़ें। यहां उन चीजों के बारे में बताया गया है, जिसे खाने से शरीर में गर्माहट बनी रहती है और सर्दियों की बीमारियां कोसों दूर रहती हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

देसी बाजरे और मक्के की रोटियां
बाजरे की तासीर सबसे गर्म होती है, जो शरीर में गर्मी पैदा करता है। इसे लहसुन की चटनी या गुड़ के साथ खा सकते हैं। ऐसे में सर्दियों के आते ही गेंहू की जगह बाजरा और मक्का का सेवन करना चाहिए। बाजरे की रोटी खाने में जितनी स्वादिष्ट लगती है, उतनी ही सेहतमंद भी होती है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

गुड़ और मूंगफली का मेल
उक्त भोजन के साथ ही अगर थोड़ा सा गुड़ और घर का निकला हुआ ताजा मक्खन मिल जाए, तो सोने पर सुहागा हो जाता है। हल्की ठंड में शाम के समय मूंगफली और गुड़ खाना एक अलग ही सुकून देता है। मूंगफली में भरपूर मात्रा में प्रोटीन और हेल्दी फैट्स होते हैं, जो ठंड के खिलाफ लड़ने की ताकत देते हैं। वहीं गुड़ शरीर को तुरंत एनर्जी देता है और खून की कमी को दूर करता है। खाना खाने के बाद थोड़ा सा गुड़ चबाने से हाजमा भी बेहतरीन रहता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

मौसमी हरी सब्जियां और मेथी का साग
इस मौसम में बाजार हरी भरी सब्जियों से भर जाता है। मेथी, बथुआ, पालक और सरसों का साग नवंबर के महीने में जरूर खाना चाहिए। मेथी हमारे जोड़ों के दर्द को दूर रखती है और शरीर में खून बढ़ाती है। वहीं गाजर और शलजम का सलाद या फिर गर्मागर्म गाजर का सूप पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है। सरसों का साग और मक्की की रोटी पारंपरिक और पौष्टिक भोजन ठंड के दिनों में शरीर को ऊर्जा और गर्माहट देता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

ड्राई फ्रूट्स और हल्दी वाला दूध
रात को सोने से पहले एक गिलास गुनगुने दूध में चुटकी भर हल्दी और थोड़े से बादाम-अखरोट मिलाकर पीने की आदत डाल लें। हल्दी एंटी-बायोटिक का काम करती है जो बदलते मौसम में होने वाली सर्दी-खांसी से बचाती है। बादाम और अखरोट शरीर को अंदर से गर्म रखते हैं और इम्युनिटी मजबूत बनाते हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

सूखे मेवे, बीजगुड़ और मूंगफली का भी सेवन करने से खून की गर्माहट बढ़ती है और ठंड कम लगती है। तिल और गुड़ के लड्डू/चिक्की की तासीर गर्म होती है और यह ओमेगा-3 व कैल्शियम से भरपूर होते हैं। बादाम और अखरोट सर्दियों के बेहतरीन सुपरफूड हैं जो शरीर को अंदर से ताकत देते हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

अदरक, लहसुन और मसालों का इस्तेमाल
खाने में अदरक, लहसुन, काली मिर्च और दालचीनी का इस्तेमाल थोड़ा बढ़ा देना चाहिए। लहसुन की तासीर गर्म होती है जो इम्यूनिटी को बूस्ट करती है। सुबह की चाय में अदरक और तुलसी की पत्तियां डालने से पूरा दिन शरीर में फुर्ती बनी रहती है। दूध में सोंठ, दालचीनी या हल्दी मिलाकर पीने से संक्रमण से बचाव होता है और ताकत बढ़ती है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

खिचड़ी और दलिया
मूंग दाल की खिचड़ी या दलिया आसानी से पच जाता है और शरीर का तापमान बनाए रखता है। इसके साथ ही सब्जियों या दाल का गर्म सूप पीने से पाचन ठीक रहता है और शरीर को तुरंत गर्मी मिलती है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

सर्दियों के लिए कुछ बेहतरीन मांसाहारी विकल्प
मटन और बीफ स्टू या रोस्ट: धीमी आंच पर पकाया गया मटन या बीफ रोस्ट शरीर को लंबे समय तक गर्माहट और ऊर्जा देता है।
चिकन सूप (Chicken Soup): लहसुन, अदरक और काली मिर्च के साथ बना गरमा-गरम चिकन सूप इम्युनिटी बढ़ाता है और ठंड से बचाता है।
मछली (Fish): ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर मछलियां जैसे सैल्मन या स्थानीय ताजी मछलियां सर्दियों में जोड़ों के दर्द से राहत देती हैं और सेहतमंद रखती हैं।
अंडे के व्यंजन: उबले अंडे या अंडे का भुर्जी-सूप सुबह के नाश्ते के लिए प्रोटीन का एक बेहतरीन स्रोत हैं।
नोटः सच का साथ देने में हमारा साथी बनिए। यदि आप लोकसाक्ष्य की खबरों को नियमित रूप से पढ़ना चाहते हैं तो नीचे दिए गए आप्शन से हमारे फेसबुक पेज या व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ सकते हैं, बस आपको एक क्लिक करना है। यदि खबर अच्छी लगे तो आप फेसबुक या व्हाट्सएप में शेयर भी कर सकते हो। यदि आप अपनी पसंद की खबर शेयर करोगे तो ज्यादा लोगों तक पहुंचेगी। बस इतना ख्याल रखिए।

Bhanu Bangwal

लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं।
मेल आईडी-bhanubangwal@gmail.com
भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।