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April 19, 2026

श्रीदेव सुमन चौक पर शराब की दुकान को लेकर कवि सोमवारी लाल सकलानी का व्यंग्य-कद्र उसी की है जग में, जिसके मुंह में खुशबू हो

श्रीदेव सुमन चौक पर शराब की दुकान को लेकर कवि सोमवारी लाल सकलानी का व्यंग्य-कद्र उसी की है जग में, जिसके मुंह में खुशबू हो।

कद्र उसी की है जग में,
जिसके मुंह पर खुशबू हो !

देवभूमि का रहने वाला हूं !
कभी पक्षपात नहीं करता हूं ।
समसामयिक घटनाचक्र पर,
प्रतिदिन कविताएं रचता हूं ।

आज तुम्हे ले चलता हूं भैय्या !
श्री देव सुमन चौक मयखाने में,
स्वर्ग मिलेगा – जहां धरती पर,
सोम संग ब्रह्मरंध्र खुल जाने से।

अब ठर्रा- टिंचरी युग नहीं भैय्या,
है पक्की शहर शान , मधुशाला।
किसी वक्त भी मिल सकता है,
बोतल पेटी मधु इच्छित प्याला।

कभी बहुत दूर दुकान शराब थी,
दस गज पैदल जाना पड़ता था !
अब स्टेशन पर ही सुरा शाला है,
अब कहीं नहीं भटकना पड़ता है।

कभी गजा रोड पर दुकान थी,
ऋषिकेश रोड़ छोर थी मधुशाला।
कभी दया पैलेश के निकट रही ,
अब तो सुमन चौक पर ही प्याला।

शराब जरुरी है जीवित रहने को !
धर्म संस्कारों में भी क्या रखा है ?
कद्र उसी की है इस कल युग में,
जिस जन के मुंह में नित खुशबू है।

अब निराश मत होना,प्यारे भैय्या,
तुम सदेह स्वर्गलोक चले जाओगे,
क्या विकास का युग नहीं आया ?
चौक चौराह मयखाने जा के देखो!

मजदूरी करके राशन खाना भैय्या,
गृहस्थी बच्चों का क्या रखना ध्यान !
दारू की बोतल पीने से प्रिय भैय्या,
बढ़ जाता है जन का मान सम्मान !

सदा सुमन चौक चंबा जा कर के,
कुछ बोतल भी घर में लेते आना।
चूर नशे में सदा तुम रहना भैय्या,
चाहे परिवार नहीं खा पाये खाना।

अतिथि सत्त्कार को शराब जरूरी,
प्रतिष्ठा प्रदर्शन को कॉकटेल प्याला,
यदि देखना है पौरुष वीर -मर्दों का,
देखो ! सुमन चौक की मधुशाला।

ऐ दीना नाथों तुम धन्य हो! धन्य तुम्हारी लीला।
सुमन को कैसी श्रद्धांजलि, चौरहा पर मधुशाला !

कवि का परिचय
सोमवारी लाल सकलानी, निशांत।
सुमन कॉलोनी, चंबा, टिहरी गढ़वाल, उत्तराखंड।

Bhanu Bangwal

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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।

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