ज्ञापन लेने में देरी, भड़के राज्य आंदोलनकारी, शासन प्रशासन के खिलाफ की नारेबाजी
देहरादून में जिला मुख्यालय स्थित शहीद स्मारक स्थल पर राज्य आंदोलनकारियों का 15 जून 2026 से क्रमिक अनशमन और धरना कार्यक्रम चल रहा है। उनकी मांग आंदोलनकारियों की सरकारी विभागों में नियुक्ति की है। जैसा कि कई बार सरकार ने उनसे वादा किया था। इसी मांग को लेकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित करने सोमवार को राज्य आंदोलनकारी जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे। ज्ञापन लेने के लिए सिटी मजिस्ट्रेट को आना था, लेकिन वह भी देरी कर गए। ऐसे में आंदोलनकारी भड़क गए और उन्होंने शासन और प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इसके बाद जब सिटी मजिस्ट्रेट मौके पर पहुंचे तो दो माह से शहीद स्मारक स्थल देहरादून में आंदोलनरत राज्य आंदोलनकारियों ने उन्हें मुख्यमंत्री धामी को सम्बोधित एक ज्ञापन सौंपा। इससे पहले शासन, प्रशासन, सरकार के ज्ञापन लेने में हो रही देरी खिलाफ जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर धरना भी दिया गया। सिटी मजिस्ट्रेट के पहुंचने पर पहले आंदोलनकारियों ने उन्हें जमकर खरी खोटी सुनाई। इस पर सिटी मजिस्ट्रेट ने अपनी व्यस्तता का हवाला देते हुए खेद भी प्रगट किया। सयुंक्त मंच के संयोजक अम्बुज शर्मा ने उन्हें ज्ञापन पढ़ कर सुनाते हुए सात दिन के अल्टिमेटम से अवगत कराया। बताया कि यदि सात दिन तक उनके पक्ष में कोई निर्णय नहीं होता तो वे आंदोलन को तेज करने के लिए कोई भी कदम उठा सकते हैं। इसकी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
मंच के संयोजक अम्बुज शर्मा ने बताया कि अभी 15 अगस्त से पूर्व प्रेस वार्ता के माध्यम से सरकार को अल्टीमेटम दिया था। इसे ज्ञापन के माध्यम से सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा गया। इसमें कि अपनी बात दौहराई गई कि अगर सात दिनों के भीतर सरकार कैबिनेट कमेटी गठित करने का आदेश नहीं देती, तो आगामी 7 कार्यदिवस के बाद आंदोलन तेज किया जाएगा। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
धरने के समर्थन में पहुंचे वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी एवं कांग्रेस नेता वीरेन्द्र पोखरियाल ने स्वयं को उक्त आंदोलन से जोड़ते हुए कहा कि वह वर्ष 1994 में डीएवी महाविद्यालय के अध्यक्ष होने के साथ सयुंक्त छात्र संघर्ष समिति के अध्यक्ष भी थे। पृथक राज्य के आंदोलन में बरेली से लेकर मैनपुरी तक की जेलयात्रा वह भी कर चुके हैं। इसलिए पूरे प्रदेश में जहां कहीं भी कोई राज्यान्दोलनकारी प्रदर्शन करता है, तो वह स्वभाविक रूप से खुद को उससे जुड़ा पाते हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों की केबिनेट कमेटी की माँग भी पूरी ना होना मुख्यमंत्री की मंशा पर संदेह पैदा करता है। अगर मुख्यमंत्री चाहें तो एक घंटे में विचलन के माध्यम से ऐसा कर सकते हैं। एक सप्ताह के अल्टीमेटम पर उन्होंने कहा कि उम्मीद है सरकार उससे पहले ही कोई सम्मानजनक हल निकाल लेगी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
क्रमिक अनशन में विकासनगर से राम किशन और उत्तरकाशी से पंकज सिंह रावत बैठे। उनके समर्थन प्रमुख रूप से उत्तराखंड महिला मंच की कमला पंत, निर्मला बिष्ट, प्रदेश कांग्रेस के सचिव महेश जोशी, डीपी सिंह, सुनीता ठाकुर, नवीन नैथानी, मोहन चंद्र शर्मा, विशम्बर दत्त बौंठियाल, आनंद सिंह तड़ियाल, दुर्गा ध्यानी, सूफी खलीक अहमद, मान सिंह, हरि प्रकाश शर्मा, बालेश बवानिया, रामपाल, सोनू गुप्ता, मान सिंह, जगत प्रसाद शर्मा, सुधीर नारायण शर्मा, दुर्गा बहादुर क्षेत्री, विजयपाल, सावित्री पंवार, सुरेश कुमार, परमा गुप्ता, रेखा शर्मा आदि धरने पर बैठे।
नोटः सच का साथ देने में हमारा साथी बनिए। यदि आप लोकसाक्ष्य की खबरों को नियमित रूप से पढ़ना चाहते हैं तो नीचे दिए गए आप्शन से हमारे फेसबुक पेज या व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ सकते हैं, बस आपको एक क्लिक करना है। यदि खबर अच्छी लगे तो आप फेसबुक या व्हाट्सएप में शेयर भी कर सकते हो। यदि आप अपनी पसंद की खबर शेयर करोगे तो ज्यादा लोगों तक पहुंचेगी। बस इतना ख्याल रखिए।



