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October 1, 2026

युवा कवयित्री अंजली चंद की कविता- महिला की इज्जत नहीं लूटी जाती

महिला की इज्जत नहीं लू
लूट जाते हैं अरमाँ
मसल दिए जाते हैं सपने
टूट जाता है आत्मसम्मान,
रात का अंधेरा ग़र महिला के लिए बाधित है तो फिर
दो प्रमाण दिन के उजाले में सुरक्षित है महिला,
वो तन पर किया अपराध
उस पीड़ा में उम्र भर मन रोता है
क्षणिक भर की दरिंदगी
पूरा जीवन अस्त व्यस्त कर देता है
गर जिंदा बच जाए तो
न्याय के लिए भटकती है
नजर ओर नज़रिए के कटघरे में
कभी पिसती है तो कभी बिखरती है। (कविता जारी, अगले पैरे में देखिए)

गर मार दी जाए तो
परिवार सड़कों में आ जाता है
वो सविंधान में वर्णित चार लाइन भी
कहा आबरू को न्याय दे पाती है
21वीं सदी में महिला सशक्तिकरण के योजनाओं से
सिर्फ अखबार ओर राजनीतिक कार्यकर्ता बोधित हैं
कपड़ें छोटा होना
कैसे गलत है?
ये देखकर नियत खराब हो जाना
क्या ये सही है?
एकबार महिला को देवी,
जिम्मेदारी, इज्जत से तुलना छोड़कर देखें
समाज में इंसान की भागीदारी जोड़कर देखें
जिस देश की स्त्री ही सुरक्षित नहीं होती
जहां दरिंदगी के लिए न्याय सालों की लड़ाई बन जाता है
ऐसा देश विश्वगुरु नहीं होता (कविता जारी, अगले पैरे में देखिए)

स्त्री शरीर नहीं है इंसान है
उसमें भी लड़कों सा ही संसार है
उसका भी अपना अधिकार है
महिला अबला नहीं है
न ही वो जिम्मेदारी है
दया की वो ना हक़दार है
वो भी इंसान है
समाज में उसको भी समानता का अधिकार है
सम्मान देना सीखो
वो भी तो लड़कों सा ही एक आकार है
उसकी आज़ादी, उसके सपनें,
उसके फैसले,उसका जीवन,
उसका अधिकार।
समाज की इज्जत से उसे न जोड़ों
महिला भी इंसान है इसे अब स्वीकारों
हक उसे देने की बात ना करो
बस हक उसका उससे न छीनों।।
कवयित्री की परिचय
नाम – अंजली चंद
बिरिया मझोला, खटीमा, उधमसिंह नगर, उत्तराखंड।
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Bhanu Bangwal

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मेल आईडी-bhanubangwal@gmail.com
भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।