ग्राम विकास विभाग के 89 वरिष्ठ लेखाकारों को वरिष्ठता सूची में शामिल करने की मांग, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद की मुख्य सचिव से हस्तक्षेप की मांग
उत्तराखंड में ग्राम विकास विभाग के लेखा संवर्ग के 89 वरिष्ठ लेखाकारों को राज्य स्तरीय वरिष्ठता सूची में शामिल न करने का मामला एक बार फिर सामने आया है। इस संबंध में राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद, उत्तराखंड ने मुख्य सचिव को पत्र देकर पूरे प्रकरण में तत्काल हस्तक्षेप करने तथा प्रभावित कर्मचारियों के हितों की रक्षा करने की मांग की है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
परिषद के अनुसार उत्तराखंड राजकीय विभाग अधीनस्थ लेखा संवर्ग सेवा नियमावली-2025 के तहत विभिन्न राजकीय विभागों के लेखा संवर्ग को प्रदेश स्तर पर एकीकृत किया गया है। इसके बाद विभागीय लेखा निदेशालय द्वारा जारी प्रथम राज्य स्तरीय अंतिम वरिष्ठता सूची में ग्राम विकास विभाग के वरिष्ठ लेखाकारों को अपेक्षित स्थान नहीं दिया गया। प्रकरण से संबंधित दस्तावेजों के अनुसार ग्राम विकास विभाग के 92 लेखाकारों के नामों का संदर्भ दिया गया है, जिनमें से केवल 3 कनिष्ठ लेखाकारों को वरिष्ठता सूची में शामिल किया गया, जबकि विभाग के 89 वरिष्ठ लेखाकार सूची से बाहर रह गए। परिषद का कहना है कि इससे इन कर्मचारियों की पदोन्नति एवं सेवा संबंधी अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
परिषद के नेताओं ने मुख्य सचिव को बताया कि ग्राम विकास विभाग के लेखा संवर्ग की वरिष्ठता का प्रकरण वर्ष 2012 से लंबित चला आ रहा है। इस दौरान संगठन एवं संबंधित विभागों की ओर से शासन स्तर पर कई बार पत्राचार और वार्ता की गई, लेकिन अभी तक मामले का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि दस्तावेजों में यह भी उल्लेख है कि ग्राम विकास विभाग के लेखाकारों को राज्य स्तरीय लेखा संवर्ग में शामिल किए जाने के संबंध में पूर्व में शासन स्तर पर विचार-विमर्श हुआ था। वहीं वर्तमान में प्रभावित लेखाकारों को पुनः ग्राम विकास विभाग के अधीन किए जाने तथा इसके लिए सेवा नियमावली में संशोधन का प्रस्ताव कैबिनेट के समक्ष रखे जाने की प्रक्रिया का भी उल्लेख किया गया है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
राज्य संयुक्त कर्मचारी परिषद ने शासन से अनुरोध किया है कि इस संबंध में कोई अंतिम निर्णय लेने से पूर्व प्रभावित कर्मचारियों एवं उनके संगठन का पक्ष विधिवत सुना जाए तथा न्यायालय में चल रहे प्रकरण के तथ्यों को भी ध्यान में रखा जाए। परिषद ने विशेष रूप से प्रभावित लेखाकारों को उनके मूल विभाग में वापस किए जाने की कार्रवाई पर रोक लगाने तथा वरिष्ठता संबंधी प्रकरण का उचित समाधान करने की मांग की है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
89 वरिष्ठ लेखाकारों के साथ न्याय होना जरूरीः अरुण पांडेय
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रदेश अध्यक्ष अरुण पांडेय ने कहा कि ग्राम विकास विभाग के लेखाकारों की वरिष्ठता का मामला कोई नया विषय नहीं है, बल्कि यह लंबे समय से लंबित है। वर्ष 2012 से चले आ रहे इस प्रकरण में कर्मचारियों ने लगातार शासन और विभागीय स्तर पर अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि जब प्रदेश स्तर पर लेखा संवर्ग को एकीकृत करने के लिए सेवा नियमावली-2025 लागू की गई है, तो ग्राम विकास विभाग के वरिष्ठ लेखाकारों की वरिष्ठता एवं पदोन्नति के अधिकारों का भी उचित समाधान होना चाहिए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने कहा कि 89 वरिष्ठ लेखाकारों को वरिष्ठता सूची से बाहर रखने और उनके भविष्य की सेवा संभावनाओं को प्रभावित करने वाले किसी भी निर्णय से पहले शासन को पूरे प्रकरण की गंभीरता से समीक्षा करनी चाहिए। अरुण पांडेय ने कहा कि परिषद किसी टकराव के पक्ष में नहीं है। कर्मचारियों के साथ न्यायपूर्ण एवं नियमसम्मत समाधान ही परिषद की प्राथमिकता है। शासन से अपेक्षा है कि संबंधित कर्मचारियों और उनके संगठन का पक्ष सुनकर ऐसा निर्णय लिया जाए, जिससे वर्षों से लंबित वरिष्ठता एवं पदोन्नति का विवाद समाप्त हो सके।
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Bhanu Bangwal
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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।



