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July 24, 2026

साहित्यकार एवं कवि सोमवारी लाल सकलानी की कविता- आवाजी: शिवजी का वाद्य यन्त्र है ढोल

कवि एवं साहित्यकार सोमवारी लाल सकलानी, निशांत सेवानिवृत शिक्षक हैं।

आवाजी : शिवजी का वाद्य यन्त्र है – ढोल !

ऐ मधुर झंकार ! सहस्त्र सुर लय ताल,
दिव्य- मनोहर ! सदाशिव निसृत नाद।
सुर सती मां वाद्य यंत्र दिव्यस्वर सागर,
सृजक सहस्त्र ताल- लय भाषा मारग।
ऐ मधुर झंकार —-
प्रथम नाद उत्पन्न हुआ जब शिव डमरू,
मां सती संग मिलन नाद वह ढोल दमाऊ।
सृजन काव्य का हुआ नाद से ध्वनि आई,
कविता का रूप मनोहर कुदरत जन पाई।
ऐ मधुर झंकार —–
ऐ मंगलमय वाद्य यन्त्र ! तुम सुख सागर,
भरते हो नित नाद नया, दिव्य ढोल सागर।
आदिकाल से जग सुनता है, मधु नाद बिच,
सहस्त्रराग उत्पन्न हुए जब, प्रकटे शिव तब।
ऐ मधुर झंकार ——
लौह खाल नट रस्सियों से, जकड़े हो तुम,
हाथ थाप सरल काष्ट से, बज उठाते तुम।
ढोल नाद उत्पन्न सरल है, सुरताल कठिन है,
आवाजी या शिवजी के, ही वाद्य यन्त्र वश है।
ऐ मधुर झंकार ——
मरी आत्मा जाग उठे,नाद ढोल के सुनकर,
जागर गीत आए अतीत से जागृति बनकर।
प्रथम पिठाईं लगे ढोल को, ब्राह्मण आवाजी,
हो जाते प्रसन्न नाद सुन, मां सती संग शिवजी।
ऐ मधुर झंकार ——
आदर कीजे ढोल ढोली का, मंगलमय जीवन,
जागृत करें सुशुप्त आत्मायें, नाद यह सुनकर।
प्रभु पश्वा रूप प्रकटे, ढोल -नाद उत्पन्न हुआ,
कलाकार मर जाता है, ढोल सदा ही अमर रहा।
ऐ मधुर झंकार ——
कवि का परिचय
कवि एवं साहित्यकार सोमवारी लाल सकलानी, निशांत सेवानिवृत शिक्षक हैं। वह नगर पालिका परिषद चंबा के स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर हैं। वर्तमान में वह सुमन कॉलोनी चंबा टिहरी गढ़वाल, उत्तराखंड में रहते हैं। वह वर्तमान के ज्वलंत विषयों पर कविता, लेख आदि के जरिये लोगों को जागरूक करते रहते हैं।