September 17, 2021

Lok Saakshya

Jan Jan Ki Awaj

Writer and poet

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देख रही है प्रिय धरा निरंतर ! फाख्ता गौरैया ग्लैडोलिया, गेंदा गुड़हल गुलदाऊदी। हरित क्षेत्र सम्मुख सुरपर्वत, पुष्प पर्ण सुरभित...

चतुर्मास मे पपीहा प्यासा ! कोविड से छा गई निराशा। चतुर्मास में पपीहा प्यासा, कोविड से छा गई निराशा। सुबह...

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आवाजी : शिवजी का वाद्य यन्त्र है - ढोल ! ऐ मधुर झंकार ! सहस्त्र सुर लय ताल, दिव्य- मनोहर...