कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर ने विधानसभा के समक्ष दिया धरना, पूरे उत्तराखंड को ओबीसी घोषित करने की मांग
उत्तराखंड कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने पूरे उत्तराखंड के लोगों को ओबीसी घोषित करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने वनों पर यहां के लोगों के पुश्तैनी अधिकार व हक हकूक को बहाल करने, उत्तराखंड राज्य में कड़ा भू कानून बनाने की भी पैरवी की है। इसे लेकर वे आज मंगलवार यानी कि 24 अगस्त को उन्होंने विधानसभा के समक्ष सुबह 11 बजे से दोपहर एक बजे तक उपवास भी किया। इस मौके पर धरने में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत सहित कई कांग्रेसियों ने शिरकत की।
गौरतलब है कि उत्तराखंड राज्य आंदोलन ने वर्ष 1994 में जब गति पकड़ी थी, तो उस समय पहले छात्रों का ओबीसी के खिलाफ आंदोलन हुआ था। तब जरूरत ये महसूस हुई कि ऐसे आंदोलन करके तब तक कोई फायदा नहीं होगा, जब तक यहां के लोगों का अपना राज्य नहीं होगा। इसके बाद उत्तराखंड संयुक्त संघर्ष समिति का गठन हुआ और छात्र, कर्मचारी, शिक्षक, वकील, विभिन्न राजनीतिक संगठन, धार्मिक संगठन, सामाजिक संगठन सब एक मंच में आकर आंदोलन में कूद गए। नतीजा नए राज्य के रूप में मिला। इसके बावजूद 20 साल बाद भी राज्य के लोगों की समस्याएं जस की तस हैं।
उत्तराखंड कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष किशोर उपाध्याय वन अधिकार को लेकर काफी समय से लड़ाई लड़ रहे हैं। इसके तहत वह विभिन्न दलों के साथ गोष्ठियां कर चुके हैं। दिल्ली के जंतर मंतर में धरना देने सहित कई माध्यमों से केंद्र सरकार तक आवाज पहुंचा चुके हैं। मुख्यमंत्री हरीश रावत भी धरने में शामिल हुए। समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ एसएन सचान, कांग्रेस नेत्री शांति रावत, मनीष कुमार, नरेंद्र सोटियाल, संग्राम सिंह गुलफाम , खुशाल सिंह रामगढ़, कांग्रेस प्रवक्ता मथुरा दत्त जोशी, नगर अध्यक्ष लालचंद शर्मा, कांग्रेस उपाध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप समेत तमाम नेताओं ने इस मौके पर सत्याग्रह में शिरकत करते हुए राज्य सरकार की इस बात को लेकर आलोचना की कि उसने आज हुए सत्याग्रह के प्रदर्शन में शामिल नेताओं को मिलने से इनकार कर दिया। इस बीच धीरेंद्र प्रताप ने कहा है कि यदि राज्य सरकार ने 1 सितंबर तक भी उत्तराखंड आंदोलनकारियों की 10 फीसद क्षेतीज आरक्षण की मांग और सम्मान पेंशन की मांग को नहीं माना तो तमाम राज्य आंदोलनकारकारी 2 सितंबर को राज्य भर में धिक्कार दिवस मनाएंगे। हर जिले जिले में पुतले जलाकर इस सरकार की निंदा की जाएगी।



