अशोक आनन की कविता-गांव नहीं छूटा
गांव नहीं छूटा
हमसे
आज भी
गांव नहीं छूटा।
जिस गांव में
हमने देखे सपने।
उन्हें सच किया
वो ग़ैर थे अपने।
हमें
अपनों के
लगाव ने लूटा।
खपरैलों के कच्चे
माटी के घर।
सुबह से लहराती
धुंए की चुनर।
देख
खुशियों का
गुब्बारा फूटा।
अपनत्व के जहां
अख़बार छपते।
सद्भाव जिनमें
समाचार लिखते।
एक भी
समाचार
न छपे झूठा।
गांव तीरथ यहां
हर घर है मंदिर।
पूजा श्रम की
यहां लिखे तक़दीर।
सवेरा
कभी न
रातों से रूठा।
कवि का परिचय
अशोक ‘आनन’, जूना बाज़ार, मक्सी जिला शाजापुर मध्य प्रदेश।
Email : ashokananmaksi@gmail.com
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