युवा कवयित्री शिवानी एमआर जोशी की कविता-मुझे बनानी है जिंदगी में अपनी एक खास पहचान
मुझे बनानी है जिंदगी में अपनी एक खास पहचान,मुझे बनना है अपने माता-पिता का अभिमान,
लाखो मुशकिलो को पार करके भी पाना है मुकाम,
समय अच्छा हो या बुरा मुझे हर जगह लिखना है अपना नाम,
जहां सब हार मान जाएंगे मुझे वन्हा जीत कर दिखाना है,
एक आजाद परिंदा बनकर कामयाबी के आसमान को छूना है,
परेशानीयों से लड़के लोग हार मांन कर बैठ जाते हैं,
उस हारी हुई भीड़ के बीच से मुझे जीत कर आना है,
वक्त के साथ सब खुद को बदल देते हैं
पर मुझे वक्त को बदल कर दिखाना है,
ना हारे हैं ना हारेंगे बस अब जीत कर दिखाना है,
कामयाबी के शिखर पर अपना नाम बखूबी लिखवाना है,
डर डर कर नहीं पर खुलकर जिंदगी को जीना है,
गिरने से हम डरते नहीं क्योंकि कामयाब बनकर दिखाना है,
आसमान मे सितारों की तरह भीड़ में नहीं अकेले चांद बनकर चमकना है,
कहीं खड़े हो तो अपना परिचय देना ना पड़े इस काबिल बन जाना है,
बेटी हूं मैं पर बेटा बनकर बैटे वाला हर काम करके दिखाना है,
जिंदगी से हार के नहीं पर जिंदगी को हराना है,
बस भीड़ भरी दुनिया में मुझे अपना अस्तित्व पहचान बनाना है।
कवयित्री का परिचय
शिवानी एमआर जोशी अहमदाबाद, गुजरात की रहने वाली हैं। वह पेशे से एक शिक्षिका हैं। उन्होंने कई लेख और संकलन लिखे और उनकी एक पुस्तक शिवानी की कलम से काव्य संग्रह प्रकाशित हुई।



