शिक्षक एवं कवि रामचंद्र नौटियाल की कविता-नकल पर विश्वास है, अकल पर नहीं
नकल पर विश्वास हैअकल पर नहीं
हैप्पी न्यू इयर पर विश्वास है
नये वर्ष पर नहीं
उमंग उत्साह हमे भाया नहीं
हैप्पी बोलना शुद्ध आया नहीं
दिन वसन्त की बयार
रात्रि बारह बजे का अन्धकार
कौन सा है मनभावन नव वर्ष
अब तुम ही करो विचार
ऐसे नकल न करते तो
भारत इण्डिया न होता
वर्षों अंग्रेजों के गुलाम न होते
कुछ तो जाग चुके
कुछ जगाने को बाकी हैं
अपनी मर्यादा अपना गौरव अपनी
संस्कृति की एक से एक
महान झांकी है
विश्वगुरु के गौरव को यदि
भारत को लौटाना होगा
तो इस तथाकथित
नकली चोले को उतारना होगा
कवि का परिचय
रामचन्द्र नौटियाल राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय गड़थ विकासखंड चिन्यालीसौड, उत्तरकाशी में भाषा के अध्यापक हैं। वह गांव जिब्या पट्टी दशगी जिला उत्तरकाशी उत्तराखंड के निवासी हैं। रामचन्द्र नौटियाल जब हाईस्कूल में ही पढ़ते थे, तब से ही लेखन व सृजन कार्य शुरू कर दिया था। वह कई साहित्यिक मंचों पर अपनी प्रस्तुतियां देते रहते हैं।



