शप्थ चोट चड़ी चटक मार मौक मिलै फटक मार हटत छोड़ि झटक मार गमका आंसू गटक मार शान शौकत ठस्क...
Lalit Mohan Gahtori
ठगो नहीं... अच्हारे हर एक बेवस को।। टेक।। ठगो नहीं रे ठगव्वा लोग... हर एक बेवस को सबको ठग ठग...
बचो बचो अच्हारे कलयुग आ रौ छ।। टेक।। बचो बचो शहर के लोग... कलयुग रौ छ भ्राता सखा और बंधु...
अच्हारे लड़कों कलयुग भाई क्यों बैरी।। टेक।। कैसी अधर्म की जीत...लड़को कलयुग भाई क्यों बैरी बचपन में तब लाड़ से...
घूंघट बीच दो नैना चलकी अंगिया पटकी सलुआ झलकी काली गोरी बाकि छोरी।। 2।। नैना मारे झप झप की घूंघट...
ओ छोरी विमला, हाय छोरी विमला। पढ़ि ले अआ-कख, लेखि ले इमला।। ओ छोरी... पढ़ि-लेखि बेर विमु, मिटलो अज्ञान। पढ़न-लेखन...
छोड़ो लौंडे की यारी जैसे गधे की सवारी सीधी साधी बात भारी कहती है यह दुनिया सारी छोड़ो लौडे की...
गुरु गुरु गुरु गुरु गुरु गुरु गुरु गुरु गुरु गुरु गुरु गुरु गुरु नहीं मिले नहीं मिले नहीं मिले नहीं...
