पैंछु पठ्याळी करा धौं कुठार कु अन्न खवा धौं मातृभुमि छ तुम्हारी भू कानुन लावा धौं माधु कु त्याग समझा...
साहित्य
मेरे शब्द मैं अपने शब्दों को लिख चुका हूं, क्या कोई, मेरे शब्द सुन सकेगा। फंसा हूं क्यों शब्दों के...
हिम कवि आ रहा घर छोड़े वर्षों बीत गए, मैं हिमगिरि पर ही घूम रहा। याद दिलाती मुझे बहुत उनकी,...
जिंदगी वतन के नाम क्या है इंसान बता तेरी ये जिंदगानी, जो काम ना आए वतन के। मौके तो बहुत...
स्वानी स्वानी... स्वानी स्वानी मुखड़ि तेरी स्वानी भलि झलकी छै... म्येरा मन बसि मूरत जसि उसि तेरी सूरत सुकली छै......
सोचकर देखा बारहा खुद को। फिर किया हमने आइना खुद को।। मैकदे से निकलते देखा है। कह रहा था जो...
मैं टालता गया मैं टालता गया... जो अवसर आया... जो अवसर आया मैं टालता गया जो अवसर आया मैं टालता...
नाटक सुन चेतुआ ना रार कर... नाटक ना बार बार कर... सुंदर शब्दों का संचय कर नित जीवन अपना उदय...
इंसाफ़ की चाहत में सत्य और इंसाफ पर पड़ जाती है मिट्टी क्योंकि कानून की देवी के आँखों पर बांध...
तलाश मैं न जाने क्यों खुशी की, तलाश में यूं ही भटकता रहा। कभी वो न मिली मुझे मैं उसकी...
