बढ़दि-घटदि हौंस-रौंस मुंड का बल जल़मि, य ज्वनि बढ़णीं च. खुटौं बटि बुढ़ापा ऐ, जिंदगी- ढऴणीं च.. मुंड-मुक-बरमंड-पैली ऐ ,...
साहित्य
जब से होश संभाला ग्वाणु दीदा उर्फ़ बैपारी भाई (व्यापारी भाई), मिस्त्री जी, उर्फ़ बाकि जी कई नामों से जाना...
कलियां, पुष्प और चन्द्र क्यों व्याकुल हृदय, तन वदन छूने को। कोमल कलियां हाथ गात लिए। पुष्प भी झुक गए,चन्द्र...
हम बदल रहे हैं हम कैसे अब बदल रहे हैं मर्यादाएँ तोड़ रहे हैं। भौतिकता में भटक रहे हैं चरित्र...
समय हूं मैं समय हूं मैं अच्छा था या बुरा, वक्त के साथ गुजर जाऊंगा। पर मुझे पता है, किसी...
लोकतंत्र है यह कैसा? जहां चले बस तानाशाही और पैसा, मांगते जो चुनाव में वोट… छापते फिर उसपर नोट। लोकमत...
आखिर ये वक्त बीत ही गया कोई खो गया कोई सो गया, कोई मिल गया, कोई रो गया। कोई जीत...
मनोभाव सोचता हूँ मैं भी अक्सर कुछ ऐसा अब कर जाऊँ । ऋषयों की भाँति मैं भी परमतत्व को जान...
यह दक्खण पंथ भी देख लिया जी ! न चुनाव हुए - न राजा हारे, बिना जंग 'सूबे' दार हैं...
आदतें छोड़ी तो नहीं बर्फ ने पिघलना, लकड़ी ने जलना धरती ने उगलना बादल ने गरजना आदतें छोड़ी तो नहीं,...
