स्वतन्त्रता सेनानी, अमर शहीद श्रीदेव सुमन नभ में हैं सेसी किरणें, तम धरा का जो मिटा लेती हैं। मानव में...
साहित्य
एक श्रद्धांजलि भागीरथी के बहाव को, तू सून रहा सुरक सुरक। जानबूझकर मौन होकर, तू देख रहा सुरक सुरक। जन्मभूमि...
श्रीदेव सुमन! शत् शत् नमन! तुम हिमालय के लाल जो बने टिहरी रियासत के काल सुमन जी ! तुम तो...
अज्ञानान्धकार तिमिर ये कैसा प्रसर रहा है मूढ़ मानव बन रहा है। अवनि भी अब रुठ रही है तरुणी निर्लज्ज...
जब उनसे मिलन होगा मंजिल मौत है यहां, फिर भी राहों पर दौड़े जा रहे। ऐसे ही चन्द्र भी चले...
वक्त तो गुजर जाता है वक्त तो गुजर जाता है, यूं कभी कहानी बनकर। अच्छी बुरी यादें रह जाती हैं,...
हम भी तो पत्थर जैसे पत्थर तेरी क्या गजब कहानी, कहीं तू इमारत की नींव बन बैठा। सहता गया छैनी...
रात भर मुझको सोचना छोड़ो। दिन में ख्वाबों को देखना छोड़ो।। दूर ही दूर होते जाओगे। दरमियां कुछ तो फासला...
एक अजब-सी उलझन में उलझी पड़ी हैं ज़िन्दगी न जाने की किस मंज़िल की तरफ भागे जा रहें न जाने...
क्या मेरे मन के आखर यूं ही क्या मेरे मन के आखर यूं ही, खुद में सिमटकर रह जाएंगे। लिखता...
