अडानी मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का एक्शन, छह सदस्यीय कमेटी का गठन, दो महीने में सेवी को जांच रिपोर्ट देने के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने अडानी-हिंडनबर्ग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए छह सदस्यीय कमेटी बनाने का आदेश दिया है। पूर्व जस्टिस एएम सप्रे कमेटी के अध्यक्ष होंगे। कोर्ट ने इस मामले में सेबी को भी गड़बड़ी की जांच का आदेश दिया है। कोर्ट ने सेबी को 2 महीने के भीतर रिपोर्ट देने को कहा है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 17 फरवरी को सुनवाई के दौरान कहा था कि वह हिंडनबर्ग रिपोर्ट की जांच के लिए गठित की जाने वाली समिति में शामिल करने के लिए केंद्र द्वारा सुझाए एक्सपर्ट्स के नाम मुहरबंद लिफाफे में दिए जाने पर वह स्वीकार नहीं करेगा। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
छह सदस्यीय कमेटी के सदस्य
पूर्व जज अभय मनोहर सप्रे (अध्यक्ष)
ओपी भट्ट
जस्टिस जेपी देवदत्त
के वी कामथ
नंदन नीलकेनी
सोमशेखरन सुंदरसन (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
सेबी से जरूरी दस्तावेज कमेटी को सौंपने को कहा
शीर्ष अदालत ने सेबी से सभी जरूरी दस्तावेज कमेटी को सौंपने को कहा है। कोर्ट ने कमिटी को अडानी मामले की जांच करने को कहा है। इसके अलावा ऐसे मामलों से निपटने के लिए मजबूत फ्रेमवर्क देने को कहा है। कोर्ट ने साथ ही कमिटी को ऐसे मामलों से निपटने के लिए मजबूत कानूनी उपाय भी सुझाने को कहा है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की पीठ ने पिछली सुनवाई में कहा था कि कोर्ट सरकार के भेजे गए नाम स्वीकार नहीं करेगी। कोर्ट ने कहा था कि वह इस मामले में पारदर्शिता बनाए रखेगी। अदालत ने कहा था कि अगर वह सरकार के सुझाए हुए नाम लेती है तो इसकी निष्पक्षता पर संदेह होगा। इसलिए शीर्ष अदालत खुद कमिटी का गठन करेगी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
एक रिपोर्ट ने दिया ग्रुप को झटका
अमेरिकी शॉर्ट सेलिंग फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च की 24 जनवरी को आई एक रिपोर्ट में दावा किया था कि अडानी ग्रुप दशकों से खुल्लम-खुल्ला शेयरों में गड़बड़ी और अकाउंट धोखाधड़ी में शामिल रहा है। हालांकि अडानी ग्रुप ने इस रिपोर्ट को झूठ का पुलिंदा बताते हुए इसे भारत के खिलाफ साजिश करार दिया था। लेकिन इस रिपोर्ट के आने के बाद से ग्रुप के शेयरों में भारी गिरावट आई है। हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के असर से महीने भर में ही गौतम अडानी की नेटवर्थ करीब 80 अरब डॉलर घट गई थी और वे चौथे नंबर से गिरकर पहले Top-10 से बाहर हुए और फिर Top-20 और Top-30 से भी बाहर हो गए थे।



