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July 25, 2026

ग्राफिक एरा में अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन, एआई को प्रकृति के संरक्षण का माध्यम बनाना समय की आवश्यकता

ग्राफिक एरा में शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों और विशेषज्ञों ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की क्षमता का उपयोग केवल जटिल समस्याओं के समाधान और कार्यक्षमता बढ़ाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसे प्रकृति और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का प्रभावी माध्यम भी बनाया जाना चाहिए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

आज ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी में सतत् कम्प्यूटेशनल तकनीकों पर दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन समारोह में मुख्य अतिथि आईआईआईटीएम ग्वालियर के निदेशक एवं आईईईई यूपी सेक्शन के इमीडिएट पास्ट चेयर डा. एसएन सिंह ने कहा कि तेजी से बढ़ती कम्प्यूटिंग क्षमताओं के साथ सस्टेनेबिलिटी को तकनीकी विकास का अहम हिस्सा बनाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि कम्प्यूटिंग तकनीकों को इस तरह विकसित किया जाना चाहिए कि वे बेहतर प्रदर्शन के साथ कम ऊर्जा की खपत करें और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को भी कम करें। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

कुलपति डा. नरपिंदर सिंह ने कहा कि सस्टेनेबिलिटी केवल विचारों और नीतियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उसे अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना ही उसकी वास्तविक सार्थकता है। राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान के महानिदेशक डा. मोहम्मद रिहान ने कहा कि औद्योगिक गतिविधियों से बढ़ता कार्बन उत्सर्जन पर्यावरण को हो रही क्षति का प्रमुख कारण बन रहा है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा प्रणाली के डीकार्बोनाइजेशन को प्राथमिकता देकर पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करनी होगी और नवीकरणीय ऊर्जा की ओर तेजी से बढ़ना होगा। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

दो दिवसीय इस अंतर्राष्ट्रीय सम्मलेन में विभिन्न विशेषज्ञ व्याख्यानों में मशीन लर्निंग, कम्प्यूटेशनल टेक्नोलॉजी, सस्टेनेबल कम्प्यूटिंग, स्मार्ट ग्रिड, साइबर-फिजिकल सिस्टम, इंटरनेट ऑफ थिंग्स डेटा एनालिटिक्स और अन्य उभरती तकनीकों से जुड़े विषयों पर चर्चा की गई। सम्मलेन में 9 देशों के प्रतिभागियों ने ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से भाग लिया।
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