Loksaakshya Social

Social menu is not set. You need to create menu and assign it to Social Menu on Menu Settings.

Social menu is not set. You need to create menu and assign it to Social Menu on Menu Settings.

July 11, 2026

युवा कवि नवीन जोशी की गढ़वाली कविता- चुल्हा कु मुछ्यालू

युवा कवि नवीन जोशी की गढवाली कविता- चुल्हा कु मुछ्यालू।

चुल्हा कु मुछ्यालू
में चुल्हा‌ कु मुछ्याऴु छो
अफुमा मस्त जलणु छो
कभी एक धोरा सी
कभी चारों धोरा सी

कभी तुमारी खाणी पेणी भडु मा बणोणु छों
कभी तुमारी नोना बाऴो चुल्हा पर तपोणु छो
कभी मंगतु की कच्ची दारू
प्यार सी बणोणू छों
कभी अपणी मेडम तें मार मुछ्यालों की करनु छों

कभी अपणी अकड़ दिखोण छों
कभी‌ जग्दा जग्दा राखु बणी उडणु छों
कभी अपणा नोना बाऴो तैं तपोणु छों
कभी मुछ्याला की मशाल बणोणु छों

कभी मुछ्याला सारा दिन रात बितोणो
कभी अपणी खैरी विपदा का आंसु बगोणु
कभी देवी देवतोणी तेरा सारा घीं का धुपाणा देणु
कभी अपणी शल्ली भोणी मा अपणी मेडम तैं याद कनू

कवि का परिचय
नाम-नवीन जोशी
कवि टिहरी गढ़वाल के पिलखी के पोस्टऑफिस में उपडाकपाल के पद पर कार्यरत हैं। वह टिहरी गढ़वाल के थौलधार विकासखंड के कोट गांव के निवासी हैं। कविता लिखना उनका शौक है।