दलित छात्रा निशु के पिता पर जानलेवा हमला और महिला पत्रकारों पर दिल्ली पुलिस की बर्बरता के खिलाफ सीटू का प्रदर्शन, गृहमंत्री का पुतला दहन
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीआईटीयू ) के बैनर तले श्रमिकों, कर्मचारियों, महिलाओं और छात्रों ने महिला पत्रकारों पर दिल्ली पुलिस की अमानवीय बर्बरता, दलित छात्रा निशु के पिता पर जानलेवा हमले की घटना के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
प्रदर्शनकारियों ने सीटू कार्यालय से राजपुर रोड पर गांधी पार्क तक जलूस निकाला। इस दौरान तानाशाही नहीं चलेगी, जनता की सरकार चलेगी, पत्रकार बचाओ, लोकतंत्र बचाओ, आदि नारों के साथ ही गृहमंत्री और दिल्ली पुलिस के खिलाफ नारे लगाए गए। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने गृहमंत्री अमित शाह का पुतला दहन किया। साथ ही स्पष्ट संदेश दिया कि सत्ता के गलियारों में बैठे लोग पुलिस का दुरुपयोग करके जनता को कुचलने का जो प्रयास कर रहे हैं, उसे अब सहन नहीं किया जाएगा। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
वक्ताओं ने कहा कि दिल्ली में जंतर मंतर के प्रदर्शन के दौरान दलित छात्रा निशु के पिता को जान से मारने की नीयत से सत्ता से जुड़े गुंडों ने हमला किया। उन्हें दिल्ली पुलिस की ओर से बचाया जा रहा है। हमले में स्वतंत्र भारद्वाज के अलावा अन्य लोग भी शामिल थे। उन्हें भी गिरफ्तार किया जाना चाहिए। इस मौके पर सीटू के जिला महामंत्री लेखराज ने कहा कि निशु के पिता पर हुए जानलेवा हमले के आरोपियों को पुलिस संरक्षण और सार्वजनिक बयानों के जरिये राजनीतिक छत्रछाया दी जा रही है। यह न्यायपालिका का खुला अपमान है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने कहा कि पत्रकार नफीसा, वरिष्ठ पत्रकार साहिन खान और अन्य पत्रकारों के साथ दिल्ली पुलिस की ओर से की गई बर्बर पिटाई ने देश के लोकतंत्र को शर्मसार किया है। वक्ताओं ने कहा कि यदि अगर पत्रकार ही सुरक्षित नहीं, तो आम जनता की सुरक्षा की गारंटी कौन देगा? यह पुलिस राज नहीं, लोकतंत्र की हत्या है। गृहमंत्री अमित शाह समेत कई बीजेपी नेताओं को कानून से ऊपर मानकर उन्हें संरक्षण देना संविधान के मूलभूत सिद्धांतों के खिलाफ है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब तक दोषी के खिलाफ कार्रवाई नहीं होगी, तब तक देश में न्याय की मौत होगी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
प्रदर्शन में उठाई गई चार सूत्री माँगें
1. निशु के पिता के हमलावरों एवं सभी पत्रकारों पर हमला करने वालों के खिलाफ त्वरित एवं स्वतंत्र न्यायिक जाँच (सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट की निगरानी में) हो।
2. दिल्ली पुलिस के दोषी अधिकारियों (पिटाई में शामिल) के खिलाफ तत्काल विभागीय कार्रवाई एवं कठोरतम कानूनी दंड सुनिश्चित किया जाए।
3. गृह मंत्रालय सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करे कि किस आधार पर आरोपियों को पुलिस संरक्षण दिया गया । यदि उत्तर संतोषजनक नहीं, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो।
4. शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा किसी भी प्रकार की बाधा, गिरफ्तारी या अत्याचार को तुरंत रोका जाए। नहीं तो अभिव्यक्ति की पूर्ण स्वतंत्रता की रक्षा को आंदोलन करेंगे। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
प्रदर्शन में ये रहे शामिल
प्रदर्शन में अखिल भारतीय किसान सभा के प्रांतीय अध्यक्ष शिवप्रसाद देवली, सीटू के जिला अध्यक्ष एसएस नेगी, उपाध्यक्ष भगवंत पायल, कृष्ण गुनियाल, अभिषेक भंडारी, हिमांशु चौहान, रवींद्र नौडियाल, बस्ती बचाओ आंदोलन के संयोजक अनंत आकाश, नितिन बौंठियाल, मोनिका एसएफआई के प्रांतीय महामंत्री शैलेन्द्र परमार आदि शामिल थे।
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Bhanu Bangwal
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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।



