पहाड़ी गीतमाला फाल्गुनी फुहार को लोकगीतों का संग्रह भी कहा जा सकता है। इनमें कुछ गीत को लेखक की ओर...
साहित्य जगत
मेरे डांडो - कांठों में आजकल सुरभित पुष्प खिले हैं। बांज बुरांश मौरू तरुवर, शांत स्निग्ध हरितपर्ण धरे हैं। प्रिय...
उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल में काली कुमाऊं के पाटी विकासखंड में एक अनोखी पारंपरिक प्रथा बेट अभी भी कायम है।...
यार फकीरी में मजा है.... यार फकीरी में मेरे दिलss मेरे दिलss मेरे दिल मेरे दिल मेरे दिल यार फकीरी...
छुट्टी का दिन था। दोपहर को रोहित पड़ोस के घर में अपने दोस्त रजत के साथ खेलने गया था। कुछ...
बगत सरकणूं च मठु - मठू करि बगत, सर्- सरकणूं च. तवा म धरीं रोटि सि, फर्- फरकणूं च.. जैं...
बेटियाँ कुंपळौं तैं तुम खिलण द्यावा, खुशबू बणी फैलण द्यावा। बन्द करा अब यों कि हत्या, जीवन जोत जगण द्यावा।।...
लेखक ने करीब 60-62 वर्ष पूर्व बच्चों की पत्रिका "चन्दामामा" में एक कहानी पढ़ी थी। लेखक का नाम याद नहीं।...
प्रो. धीरेंद्र शर्मा लिखित प्रकाशित पुस्कत UNCHARTED LIFE’S JOURNEY से एक अंश। प्रो. धीरेंद्र शर्मा जेएनयू से सेवानिवृत्त हैं। इस...
रगड़ा-झगड़ा सोचु भिंडि च-हमन, जीवन म अपड़ा भी. क्य ब्वन-दगड़म चल़णा छिं, सौ रगड़ा भी.. मनखी सोच्यूं-अर गड़्यूं, कख तक...
