रेलगाड़ी के डब्बे की तरह मकानों की लाइन। सभी घर एक दूसरे से जुड़े हुए। 60 के दशक में किसी...
साहित्य जगत
मीडिया की प्रासंगिकता और वर्तमान स्वरूप में उसमें आते बदलाव से परिचित कराती पुस्तक ‘साये में मीडिया’ का आज उत्तराखंड...
कहावत है कि जैसा करोगे संग, वैसा चढ़ेगा रंग। यानी व्यक्ति पर संगति का भी असर पड़ता है। अच्छे व्यक्तियों...
मूर्धन्य साहित्यकार, पत्रकार, शिक्षाविद एवं समाजसेवी आदरणीय श्री सोमवारी लाल उनियाल 'प्रदीप' जी की नई काव्य कृति "बचे हैं शब्द...
दीवेंद्र सिवाच आकाशवाणी देहरादन में प्रोग्राम एग्जीक्यूटिव हैं। इससे पहले वह इसी पद पर आकाशवाणी इलाहबाद में तैनात थे। सरल...
करो मेहनत वही पूजा! लिखूं ऐसा कभी मैं भी, कि जन के मन समा जाए। मुझे संतोष दे मन का,...
कोई व्यक्ति जब खुद गलत राह में होता है, तो वह दूसरों को ऐसे मार्ग पर न चलने के लिए...
कानून हमें आरक्षण दे दो। मेरा प्यारा हिन्दुस्तान, जहां आरक्षण सदाबहार। आजादी के वर्ष बहत्तर, आरक्षण ही खेवनहार। मेरा प्यारा...
दो दिन की काट खाने वाली ठंड के बाद जब चटक धूप खिली। यह पहाड़ी धूप है। जिसमें धुंध नहीं...
आज मैं भी मुस्कुराना चाहता हूँ। साल बीसा को भुलाना चाहता हूँ। आ गया है द्वार पे नव वर्ष देखो।...
