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September 10, 2026

साहित्य जगत

जिसका बचपन जहां बीतता है, व्यक्ति उस स्थान को अक्सर याद करता रहता है। बचपन के साथी भी अक्सर याद...

साहित्यकार ललित मोहन रयाल अपनी विशिष्ट लेखन शैली के लिए जाने जाते हैं। हालांकि अभी उनकी दो पुस्तकें 'खड़कमाफी की...

वंदे मातरम आइये गायें सभी मिल गान वंदे मातरम्। है हमारी अस्मिता पहचान वंदे मातरम्।। इस देश के गौरव भरे...

"नेक ऐसी बेटिया" मिटाने पर भी झिलमिलाए, रेख ऐसी बेटियां। डांटने पर भी मुस्कराए, नेक ऐसी बेटियां। फूल की सुगंध...

माता पिता के लिए उपकार होती हैं बेटियाँ, घर-आँगन को महकाये वो फूल होती हैं बेटियाँ। मान-सम्मान, अभिमान होती हैं...