पंदेरा-नवळा पंदेरा बड़िगीं गदेरा, नवळा सूखि गींन. नलौं कु भरोसु कनम कन, टूटि गींन.. गौं-गौं घर-घरौं, पांणी रूणु ह्वेगे आज,...
साहित्य जगत
बढत-घटत एक बग्त छौ, सबि कुछ- बढदि ग्याई. इनु बि बग्त ऐ, सबि कुछ- घटदि ग्याई.. पैल्याकु समै, खेति- औलाद...
ठंडु-मिठु बतौ- इनि बि, क्यांकि उठा-पोड़ ह्वे जांद. बात- पीछा, क्यांकि दौड़ा- दोड़ ह्वे जांद.. सै- पे- कि क्वी काम,...
शिक्षक शिष्य का भाग्य विधाता शिक्षक दिवस अति पावन है, सब शिक्षक जनों का अभिनंदन है। जो भी शिक्षकों को...
कवि एवं साहित्यकार दीनदयाल बन्दूणी ने शिक्षक दिवस के दिन अपनी रचना को अपने गुरु को समर्पित किया है। उन्होंने...
बग्त-कुबग्त बग्त फरि, कुबग्त कि बि- सोचि ले. बुरु बगत कु, सारु अपणूं खोजि ले.. जीवन त चखलु सी, फुर्र...
इनु बि क्य कन कछिड़ि जुटयीं-तुमरि, इनु बि क्य. जोग-ध्यान लगायी-इबरि, इनु बि क्य.. दिन-भर मैफल जमै, रम्मी- तास खेली,...
अ से अ: तक... अ से अक्षर लिखना सीखो आ कर मुझसे कहना सीखो इ तना सीधा सपना देखो ई...
बदलेंदु-बग्त सिवऴु सी जमि ग्या, दिल- दिमाग फरि. बस नि रौ, भैर-भित्रा जऴदि आग फरि.. क्य ब्वन-कैम ब्वन, कुछ नि...
गढ़वऴि भाषा दिवस गढ़वऴि भाषा कु दिवस च, बल आज. भाषा अपड़ि हमन बचांण, चल आज.. गढ़वऴि ब्वाला- बच्यावा, याच...
