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May 3, 2026

साहित्य जगत

पंदेरा-नवळा पंदेरा बड़िगीं गदेरा, नवळा सूखि गींन. नलौं कु भरोसु कनम कन, टूटि गींन.. गौं-गौं घर-घरौं, पांणी रूणु ह्वेगे आज,...

ठंडु-मिठु बतौ- इनि बि, क्यांकि उठा-पोड़ ह्वे जांद. बात- पीछा, क्यांकि दौड़ा- दोड़ ह्वे जांद.. सै- पे- कि क्वी काम,...

शिक्षक शिष्य का भाग्य विधाता शिक्षक दिवस अति पावन है, सब शिक्षक जनों का अभिनंदन है। जो भी शिक्षकों को...

कवि एवं साहित्यकार दीनदयाल बन्दूणी ने शिक्षक दिवस के दिन अपनी रचना को अपने गुरु को समर्पित किया है। उन्होंने...

इनु बि क्य कन कछिड़ि जुटयीं-तुमरि, इनु बि क्य. जोग-ध्यान लगायी-इबरि, इनु बि क्य.. दिन-भर मैफल जमै, रम्मी- तास खेली,...

गढ़वऴि भाषा दिवस गढ़वऴि भाषा कु दिवस च, बल आज. भाषा अपड़ि हमन बचांण, चल आज.. गढ़वऴि ब्वाला- बच्यावा, याच...