जीत-हार हरेका जीवनम, उकाळ- उंदार च. क्वी- डरि जांद, कैकु- बेड़ापार च.. हिकमत न टुटड़ि द्या, एक - हैंका, हिकमत...
साहित्य जगत
महिलाओं के उत्थान के लिए काम करने वाली जानी मानी सामाजिक कार्यकर्ता और कवियत्री कमला भसीन का आज सुबह 75...
गूंणि बांदर अछे ? रै-होला हम, गूंणि-बांदर पैलि कबि. सची ? हमरि बि- क्य, पूंछ- रै-ह्वेलि कबि.. सैन्स कि खोज-...
गाड-गदिनु बसगाऴ- बोगदि गाड, गौंक छाल-छाल. कन करद- स्वीस्याट, गौक छाल- छाल.. गदिनु- बड़ि जांद- गाड, रोलि नी- तरेंदि, बगि...
नामदार ऊंची दुकान-फीकू पक्वान, ठिकी ब्वाल कैन. अपड़ि बात- अपड़ि छांच, अफी छ्वाळ कैन.. बड़ा- बड़ा नौं- का पैथर, यथ-...
रुतबा व ! रुतबा-मान-सम्मान, अब कख रैगे. कैकि - भलै कु- ऐसान, अब कख रैगे.. तेरु कर्यूं- बोल्यूं , त्वेमक...
सिपै-दादा हमरि सान-ईमान-गुमान, तुम छवा सिपै-दादा. बग्त हो-या कुबग्त, देसा-काम अवा सिपै-दादा.. छाति नि झुकि-न झुकलि, कैक अगोड़ि कबि, देश...
मां सरस्वती हे मां सरस्वती, तू प्रज्ञामयी मां चित्त में शुचिता भरो, कर्म में सत्कर्म दो बुद्धि में विवेक दो...
ज्यू-बुथै हमकु त बस, ज्यू- बुथ्यांणु हुयूं. ऊँ- कु- त, जिकुड़ि जळांणु हुयूं.. रोज भेजिदे, कखड़ि-मुंगर्युं फोटु, दिखै- दिखै हमथैं,...
बेगार हमन त जिंदगी भर, सचम बेगार कायी. अपड़ि जिंदगी, और्यूं पैथर बेकार कायी.. यूंका-ऊंका-सूंका पैथर , कख नि रीटा,...
