नामदार ऊंची दुकान-फीकू पक्वान, ठिकी ब्वाल कैन. अपड़ि बात- अपड़ि छांच, अफी छ्वाळ कैन.. बड़ा- बड़ा नौं- का पैथर, यथ-...
साहित्य जगत
रुतबा व ! रुतबा-मान-सम्मान, अब कख रैगे. कैकि - भलै कु- ऐसान, अब कख रैगे.. तेरु कर्यूं- बोल्यूं , त्वेमक...
सिपै-दादा हमरि सान-ईमान-गुमान, तुम छवा सिपै-दादा. बग्त हो-या कुबग्त, देसा-काम अवा सिपै-दादा.. छाति नि झुकि-न झुकलि, कैक अगोड़ि कबि, देश...
मां सरस्वती हे मां सरस्वती, तू प्रज्ञामयी मां चित्त में शुचिता भरो, कर्म में सत्कर्म दो बुद्धि में विवेक दो...
ज्यू-बुथै हमकु त बस, ज्यू- बुथ्यांणु हुयूं. ऊँ- कु- त, जिकुड़ि जळांणु हुयूं.. रोज भेजिदे, कखड़ि-मुंगर्युं फोटु, दिखै- दिखै हमथैं,...
बेगार हमन त जिंदगी भर, सचम बेगार कायी. अपड़ि जिंदगी, और्यूं पैथर बेकार कायी.. यूंका-ऊंका-सूंका पैथर , कख नि रीटा,...
निकमु-बग्त मोल- भौ न-पूछ कैसे, बग्त निकमू ऐगे आज. ना नि बोल़- कै बातौ, हांजि- हांजि रैगे आज.. भेड़चाला- यो...
सत-करम जिंदगी भर करम करि, अब कुछ धरम करिले. तनि कटिगे यो जीवन, अब ज्यू भरम करिले.. इत्गा त तू-जांड़िगे...
जतन जतन से कर्यूं काम, समै फरि निभि जांद. छ्वटि-म्वटि कमि-बिसी, अफी छुपि जांद.. करण वऴा से-बल, भूल- बिसर हूंदी...
बालिकाये सरल हृदय की होती है बालिका सरस्वती की वाणी होती है, बालिका ही दुर्गा कल्याणी होती है। बालिका को...
