साहित्यकार ललित मोहन रयाल एक कुशल गद्यकार हैं और अपनी विशेष व्यंग्य शैली के लिए जाने जाते हैं। उनकी तीन...
साहित्य जगत
विश्वास किंतु नहीं खोना है चारो ओर फैली निराशा, दिखती नही कहीं कोई आशा, विश्वास किंतु नही खोना है ।...
भारत मां के लाल बिपिन रावत विश्वास नहीं होता ! भारत मां के लाल उत्तराखंड के जवान उत्तराखंड के शेर...
"मैं" नेता नहीं हूं! सच कहते हैं, लोग कि "मैं" नेता नहीं हूं! क्योंकि मैं किसी से कुछ लेता नहीं...
ऐ पहाड़ मेरे पहाड़ ऐ पहाड़, मेरे पहाड़, तेरे पलायन का रोना रोने वाले बहुत हैं, पर कभी खुद चढ़ना...
कितना कितना झूठ है मेरे चारों ओरसच है जो भी, झूठ पर टिकाउक्ताहट की स्थितियों मेंसबसे बड़ा सहारा हैतोड़ने को...
दर्पणप्रतिबिंब देखने को पूरा दर्पण आधा पूरा हैलेकिन दूरी तय कर लो तो उसके बिना अधूरा हैदर्पण के हो बहुत...
मन चलो करो सीमोल्लंघन। बिन छोड़े मर्यादा बन्धन।। अतल गगन का है आमन्त्रण। नव नवल क्षितिज का आकर्षण।। अज्ञात पंथ...
हम लचार नि छवां हम कुछ बि छवां, पर- लाचार नि छवां. आजबि अपड़-पर्या फरि, भार नि छवां.. लेन-देन आफत-बिपत,...
माँ कालिंका मेरि बड्यर्यूं कि कालिंका माँ, दैंणी ह्वेकि जै. आस लेकि- औंला हम, माँ- खुसी देकि जै.. तेरा थानम...
