कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना। ये गाना मैने बचपन में सुना था। तब शायद इसका सही...
साहित्य जगत
आजकल फैशन का जमाना है। इसके बगैर तो शायद ही कोई अपनी योग्यता का परिचय किसी को नहीं करा सकता।...
अक्ल के टप्पू, सिर पर बोझ घोड़े पर अप्पू। इस कहावत को मैं बचपन से ही पिताजी से मुख से...
इंजीनियर साहब जब भी दो पैग चढ़ाते थे, तो वे एक कविता को दोहराने लगते थे। जोर की आवाज में...
देहरादून में राजपुर रोड स्थित एक होटल के लॉन में लगे पंडाल में डीजे बज रहा था। भीतर वैडिंग चेयर...
छुट्टी का दिन था। दोपहर को रोहित पड़ोस के घर में अपने दोस्त रजत के साथ खेलने गया था। कुछ...
देखो जी ! यह भी इक तारा, सौरमंडल का जलता तारा। उगता है यह धार के ऊपर, छिप जाता है...
उन दिनों गजेंद्र बुरे दौर से गुजर रहा था। वह जो भी काम करता उसमें उसे घाटा होता। कड़ी मेहनत...
वैसे तो अब चिल्लर की जरूरत कभी-कभार ही पड़ती है। जब लोग मंदिर जाते हैं तो भगवान को चिल्लर चढ़ाने...
बुजुर्ग लोग सही फरमाते हैं कि जो रास्ता पहले से नहीं देखा, उस पर नहीं चलना चाहिए। कई बार शार्टकट...
