बाखुलि बांजि बांजि... ओखुली माटा पाटा भरी गई छना बाखुली बांजि बांजि पड़ि रई छना देलि आंगन नानतिना हस्नि खेलनि...
साहित्य जगत
समाजसेवी अन्ना हजारे का आंदोलन और बड़ी संख्या में युवा वर्ग का उससे जुड़ना। शहर व गांव में युवकों ने...
कई बार तो देखा गया कि शुरुआत में जिस चीज का विरोध होता है, बाद में वही काम की निकलती...
उन दिनों पोपटलाल जी काफी खुश नजर आ रहे थे। बात वर्ष 2013 की है। उन्होंने पहले से ज्यादा घूमना...
ये प्रकृति भी अजीबोगरीब खेल दिखाती है। कहीं सुख का अहसास कराती है, तो कभी इसका दुख रूपी ऐसा रूप...
बचपन से आज तक देखता रहा हूं कि हम छोटी-छोटी बातों पर दूसरे पर निर्भर होते जा रहे हैं। चाहे...
सब छपा है, सब छपा है, आज इन अखबार में। मैं छपा हूं, तू छपा है, ये छपा है, वो...
बचपन में मुझे जो पसंद था, काश आज भी वही होता तो शायद मैं खुश रहता। क्योंकि तब मैं ज्यादा...
योगी नहीं ये तो भोगी हैं। साधु नहीं ये तो स्वादु हैं। जिनका काम दूसरों को नसीहत देना है, लेकिन...
हिम की चादर ओढ़े पर्वत चांदी की चादर ओढ़े पर्वत, कुछ दिन निंद्रालय में होंगे। बसंत ऋतु की आहट पाते,...
