अशोक आनन की कविता- आदमी पनौती है
झूठ है
आदमी पनौती है।
नाकामी का ठीकरा
औरों पर मत फोड़िए।
दिलों का बढ़े फ़ासला
आज ज़िक्र वो छोड़िए।
भूख़ को
ज़िंदगी चुनौती है।
दीवारों ने घरों को
कहीं का न आज छोड़ा।
सिर उठाकर इन्हीं ने
हवाओं का रुख़ मोड़ा।
तमस को
रोशनी फिरौती है। (कविता जारी, अगले पैरे में देखिए)
गठरी खोलने को अब
सांसें बैठी तैयार।
सूरज डूबने का है अब
सांझ को इंतज़ार।
दोपहर
धूप की बपौती है।
ज़िंदगी ने अब हमसे
छुड़ा लिया अपना हाथ।
नींद में ही छूट गया
अब सपनों का भी साथ।
नींद ही
स्वप्न की मनौती है।
कवि का परिचय
अशोक आनन
जूना बाज़ार, मक्सी जिला शाजापुर मध्य प्रदेश।
Email : ashokananmaksi@gmail.com
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