नवजात वेंटिलेशन की सही समझ और समय पर प्रबंधन है बेहद जरूरीः डॉ. देवरारी
देहरादून के डोईवाला क्षेत्र में स्थित हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (हिम्स) जौलीग्रांट में नवजात वेंटिलेशन विषय पर आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला का सफल समापन हो गया। कार्यशाला में देश के विभिन्न राज्यों से आए विशेषज्ञों और चिकित्सकों ने नवजात शिशुओं की उन्नत वेंटिलेशन तकनीकों, नवीन उपचार पद्धतियों एवं गंभीर रूप से बीमार नवजातों की देखभाल से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर अपने अनुभव साझा किए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
नवजात शिशु रोग विभाग एवं बाल रोग विभाग द्वारा नेशनल नियोनेटोलॉजी फोरम उत्तराखंड चैप्टर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला में लगभग 60 नवजात रोग विशेषज्ञों, बाल रोग विशेषज्ञों, फेलोज एवं रेजिडेंट चिकित्सकों ने भाग लिया। प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए एसआरएचयू के प्रति कुलपति डॉ. ए.के. देवरारी ने कहा कि नवजात शिशुओं में श्वसन संबंधी समस्याएं मृत्यु और गंभीर जटिलताओं का एक प्रमुख कारण हैं। ऐसे में नवजात वेंटिलेशन की सही समझ और समय पर उचित प्रबंधन अत्यंत महत्वपूर्ण है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं चिकित्सकों को नवीनतम वैज्ञानिक ज्ञान और व्यावहारिक कौशल से सशक्त बनाती हैं, जिससे नवजात शिशुओं की देखभाल की गुणवत्ता में सुधार होता है और बेहतर स्वास्थ्य परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
कार्यशाला के दौरान डॉ. प्रवीन कुमार, डॉ. श्रीनिवास मुर्की एवं डॉ. नवीन जैन ने नवजात शिशुओं में श्वसन क्रिया विज्ञान की मूलभूत अवधारणाओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने ऑक्सीजन आपूर्ति, कार्बन डाइऑक्साइड निष्कासन, श्वसन यांत्रिकी, फेफड़ों की कंप्लायंस एवं रेजिस्टेंस तथा वेंटिलेटर सेटिंग्स जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी दी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
वहीं, डॉ. दीपक चावला, डॉ. आशीष जैन एवं डॉ. रमेश अग्रवाल ने प्रतिभागियों को उन्नत वेंटिलेशन तकनीकों, विभिन्न वेंटिलेशन मोड्स तथा आधुनिक उपचार रणनीतियों से अवगत कराया। डॉ. सैकत पात्रा एवं डॉ. चिन्मय चेतन ने पल्मोनरी ग्राफिक्स, संक्रमण नियंत्रण उपायों तथा नवजात वेंटिलेशन में गुणवत्ता सुधार संबंधी पहलों पर व्याख्यान दिए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
कार्यशाला में नवजात वेंटिलेशन सेवाओं की स्थापना, सुदृढ़ीकरण तथा वेंटिलेशन से जुड़ी व्यावहारिक चुनौतियों पर भी विशेषज्ञों ने विचार-विमर्श किया। कार्यक्रम में अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, पंजाब, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, तेलंगाना, बिहार एवं उत्तराखंड सहित देश के विभिन्न राज्यों से आए प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
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Bhanu Bangwal
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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।


