जंतर मंतर में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में देहरादून में जोरदार प्रदर्शन, छात्र, अभिभावक, राजनीतिक और सामाजिक संगठन हुए शामिल
दिल्ली के जंतर मंतर में आंदोलन कर रहे युवाओं और नागरिकों के आंदोलन के दौरान गत दिवस 20 जुलाई को पुलिस की ओर से किए गए लाठीचार्ज के विरोध में उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में भी गुस्सा फूट पड़ा। देहरादून के परेड मैदान में बड़ी संख्या में छात्र, अभिभावक, राजनीतिक दलों से जुड़े लोग, नागरिक, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि एकत्र हुए और परेड ग्राउंड से घंटाघर तक प्रतिरोध मार्च निकाला। इसके बाद जिला मुख्यालय पहुंचकर प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा गया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
प्रदर्शन के दौरान उपस्थित छात्रों ने दिल्ली में सरकार के इशारे पर हुए लाठीचार्ज, पुलिसिया दमन और लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। इस अवसर पर सतीश धौलाखंडी एवं उनके साथियों की ओर से जनगीत प्रस्तुत किए गए। उन्होंने प्रदर्शन में मौजूद लोगों का उत्साह बढ़ाया और आंदोलन को सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के माध्यम से और अधिक सशक्त बनाया। दिल्ली में आयोजित छात्र मार्च में शामिल होकर देहरादून लौटे स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) से जुड़े छात्रों का इस दौरान स्वागत किया गया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं पूर्व छात्र नेताओं में निर्मला बिष्ट, हिमांशु चौहान, लेखराज, पंकज क्षेत्री, त्रिलोचन भट्ट, कमला पंत, ने अपने विचार रखे और छात्रों के लोकतांत्रिक आंदोलन पर हुए दमन की कड़ी निंदा की। सभा में एसएफआई के उत्तराखंड प्रदेश अध्यक्ष नितिन मलेठा ने कहा कि दिल्ली पुलिस की ओर से किया गया दमन पूरी तरह पूर्वनियोजित था। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने कहा कि बिना नेमप्लेट और बिना वर्दी के पुलिसकर्मियों द्वारा छात्रों को पीटना कानून के शासन पर सीधा हमला है। यह पूरी तरह मनमानी और साजिश का हिस्सा था। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों की मांग कर रहे छात्रों के साथ इस प्रकार का व्यवहार किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वीकार नहीं किया जा सकता। डीएवी पीजी कॉलेज छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष लेखराज ने कहा कि जो सरकार छात्रों और बच्चों पर लाठियां बरसाती है, उसे सत्ता में बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने छात्र आंदोलन के साथ एकजुटता व्यक्त करते हुए लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए व्यापक जनएकजुटता का आह्वान किया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
प्रदर्शन के दौरान कई छात्रों ने भी अपने अनुभव एवं विचार साझा किए और शिक्षा, रोजगार तथा लोकतांत्रिक अधिकारों के सवालों पर विस्तार से चर्चा की। इस अवसर पर अरमान ने एक प्रेरणादायक रैप गीत प्रस्तुत किया। इसके माध्यम से उन्होंने जनता से अन्याय और दमन के खिलाफ जागरूक होकर संघर्ष में भागीदारी की अपील की। एसएफआई के देहरादून जिला सचिव अयाज खान ने दिल्ली पुलिस द्वारा किए गए दमन के अपने प्रत्यक्ष अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि किस प्रकार शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर सुनियोजित तरीके से बल प्रयोग किया गया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
दिल्ली से लौटे मुकुल, कनिका, अर्सलान, सौरभ, अनामिका, इजराइल तथा समीर ने भी सभा को संबोधित किया और जंतर-मंतर पर हुए घटनाक्रम, पुलिसिया दमन तथा छात्रों के संघर्ष के अनुभवों को विस्तार से साझा किया। प्रदर्शन के समापन पर उपस्थित सभी छात्रों, युवाओं एवं नागरिकों से दिनांक 22 जुलाई 2026 को गांधी पार्क, देहरादून में आयोजित होने वाले विरोध-प्रदर्शन में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने का आह्वान किया। ताकि छात्रों पर हुए दमन के खिलाफ लोकतांत्रिक आवाज को और अधिक मजबूत बनाया जा सके। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन
इस प्रदर्शन के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों एवं छात्र संघों के एक संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुँचकर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में दिल्ली में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए कई अहम माँगें रखी गई हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
ज्ञापन की प्रमुख माँगें
केंद्रीय शिक्षा मंत्री का तत्काल इस्तीफा
NEET-UG 2024 एवं 2026 की पेपर लीक की घटनाओं के लिए नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाया जाए। ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि सर्वोच्च न्यायालय ने भी कहा कि यह अत्यंत दुखद है कि उन्होंने 2024 से सबक नहीं सीखा।
NTA का पूर्णतः उन्मूलन
बार-बार होने वाली परीक्षा अनियमितताओं के चलते राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को भंग कर एक संविधिक निकाय का गठन किया जाए।
लाठीचार्ज की स्वतंत्र न्यायिक जाँच
कल जंतर-मंतर एवं संसद मार्ग क्षेत्र में हुई पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जाँच करवाई जाए तथा दोषियों को कानूनी दंड मिले।
प्रधानमंत्री राष्ट्र से माफी माँगें
परीक्षा प्रणाली की बार-बार की विफलताओं एवं छात्रों पर हुए दमन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं राष्ट्र से क्षमा माँगें।
NEP 2020 को वापस लिया जाए
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, जिसे “छात्र-विरोधी” बताया गया है, को तत्काल रद्द किया जाए।
घायल प्रदर्शनकारियों को तत्काल राहत एवं मुआवज़ा
सभी घायलों को उचित चिकित्सा सुविधा एवं मुआवज़ा प्रदान किया जाए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
घटना की गंभीरता
ज्ञापन में कल दिल्ली के जंतर-मंतर एवं संसद मार्ग क्षेत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध किए गए बर्बर लाठीचार्ज एवं आँसू गैस के प्रयोग को अत्यंत दुःखद एवं चिंताजनक बताया गया। इस कार्रवाई में 60 से अधिक प्रदर्शनकारी एवं 100 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए। इसे लोकतंत्र, संविधान द्वारा प्रदत्त शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार और मानवीय गरिमा का स्पष्ट उल्लंघन बताते हुए पूर्ण निंदा की गई। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
राष्ट्रपति से अपील
·सरकार आंदोलनकारियों से वार्ता करे एवं माँगों पर सकारात्मक निर्णय ले।
·लाठीचार्ज की निष्पक्ष न्यायिक जाँच करवाई जाए।
·घायल प्रदर्शनकारियों को उचित चिकित्सा एवं मुआवज़ा दिया जाए।
·भविष्य में ऐसी कार्रवाई न हो, इसके लिए सख्त निर्देश जारी हों।
·NEET एवं अन्य राष्ट्रीय परीक्षाओं में पारदर्शिता, निष्पक्षता एवं जवाबदेही सुनिश्चित की जाए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
प्रतिनिधियों का आश्वासन
सभी संगठनों ने शांतिपूर्ण, संवैधानिक एवं अहिंसक आंदोलन में अपनी आस्था व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वे चाहते हैं कि सरकार अड़ियल रुख छोड़कर जनसमस्याओं को सुने और संवाद के माध्यम से हल करे, दमन के रास्ते पर न चले। ज्ञापन में कहा गया कि आंदोलनकारियों की माँगें पूर्णतया तार्किक, संवैधानिक एवं न्यायोचित हैं। प्रतिनिधिमंडल ने आशा व्यक्त की कि राष्ट्रपति इस न्यायपूर्ण पुकार को सुनेंगे और संबंधित अधिकारियों को माँगें मानने हेतु निर्देशित करेंगे। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
प्रतिनिधिमंडल में शामिल नेता और कार्यकर्ता
जिलाधिकारी को ज्ञापन देने वालों सीपीएम के जिला सचिव अनन्त आकाश, राष्ट्रीय उत्तराखंड पार्टी के केन्द्रीय महामंत्री बालेश बबानिया, उत्तराखंड आन्दोलनकारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष सुरेश कुमार, नेताजी संघर्ष समिति के अध्यक्ष प्रभात डंडरियाल, सीआईटीयू के जिला अध्यक्ष एसएस नेगी, भीम आर्मी के अध्यक्ष आजम खान, एआईएलयू से एडवोकेट अनुराधा, दुर्गा ध्यानी, डीवाईएफआई से नितिन मलेठा, यूकेडी के केन्द्रीय महामंत्री लताफत हुसैन, विकास रावत, अमित परमार, रामसिंह भंडारी, अमर सिंह, आनन्द मणी डंगवाल, देवेश्वर काला, मंजू सकलानी आदि शामिल थे।
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