ललित मोहन गहतोड़ी की कुमाऊंनी कविता- बाजार बागवानी
बाजार बागवानी
प्यारी लाड़ हैगो त्वे संग
मेरी जुनाली परानी
तेरा संग मैं लै घुमनु
बाजार बागवानी
तेरी स्वानी-स्वानी मुखड़ी
भली-भली लागछि सुकली
नाक नुकली-नुकली
आंखा तिखली-तिखली
तेरा रूप को पुजारी
मैकै सब बोलानी
तेरा संग… प्यारी लाड़ हैगो… (कविता जारी, अगले पैरे में देखिए)
जब संग मेरा तू छै
मैं के कमी कसि कै
ज्यूदी परानी तू छै
मरनी परानी तू छै
त्वे खन नै हुन द्यूनू
मैं के लै परेशानी
तेरा संग… प्यारी लाड़ हैगो…
तेरा रूप-रंग देखछू
तेरा गाल ले रिझाछू
तेरो हिटनु बड़ो गजब छ
तू छै मेरी घर पधानी
मैं कै भौत भलो लागछ
तेरो मिठो-मिठो बोलानी
तेरा संग… प्यारी लाड़ हैगो…
रचनाकार का परिचय
ललित मोहन गहतोड़ी उत्तराखंड में काली कुमाऊं चंपावत से प्रकाशित होने वाली वार्षिक सांस्कृतिक पुस्तक फुहारें के संपादक हैं। वह जगदंबा कालोनी, चांदमारी लोहाघाट जिला चंपावत, उत्तराखंड निवासी हैं।
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Bhanu Bangwal
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मेल आईडी-bhanubangwal@gmail.com
भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।


