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July 14, 2026

वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने की दिशा में यूकॉस्ट की पहल, उत्तरकाशी में दो दिवसीय शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला

उत्तराखण्ड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (UCOST) के तत्वावधान में और अगस्त्य इंटरनेशनल फाउंडेशन के सहयोग से जनपद उत्तरकाशी में दो दिवसीय टीचर लर्निंग वर्कशॉप का शुभारंभ हुआ। विज्ञान शिक्षण को अधिक प्रभावी, रोचक एवं गतिविधि-आधारित बनाने के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यशाला में जनपद के लगभग 35 विज्ञान शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

यह उत्तरकाशी में आयोजित तीसरी शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला है। पूर्व में आयोजित दोनों कार्यशालाओं के सकारात्मक परिणाम विद्यालयों में विज्ञान शिक्षण की गुणवत्ता में स्पष्ट रूप से देखने को मिले हैं। इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए इस बार भी शिक्षकों को अनुभवात्मक एवं गतिविधि-आधारित शिक्षण की नवीन तकनीकों से परिचित कराया जा रहा है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

कार्यशाला का शुभारंभ मुख्य शिक्षा अधिकारी, उत्तरकाशी शैलेन्द्र अमोली ने दीप प्रज्ज्वलन एवं एक प्रेरक भौतिक विज्ञान प्रयोग के साथ किया। उन्होंने कहा कि आज की शिक्षा व्यवस्था में विज्ञान को केवल सैद्धांतिक विषय के रूप में नहीं, बल्कि प्रयोग, जिज्ञासा और नवाचार से जोड़कर पढ़ाना समय की आवश्यकता है। इससे विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तार्किक चिंतन तथा समस्या-समाधान की क्षमता विकसित होती है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

 

प्रशिक्षण का संचालन अगस्त्य इंटरनेशनल फाउंडेशन के मास्टर ट्रेनर/कैटालाइज़र अशोक जिन्नाटा ने किया। उन्होंने गुरुत्वाकर्षण, बल, ऊर्जा, दाब, प्रकाश तथा गति जैसे वैज्ञानिक सिद्धांतों को सरल एवं रोचक प्रयोगों के माध्यम से प्रस्तुत करते हुए अनुभवात्मक शिक्षण (Experiential Learning) की प्रभावी तकनीकों का प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षण में इग्नेटर रोशन पवार एवं जसपाल सिंह राणा ने सहयोग प्रदान किया, जबकि कन्हैया लाल ने कार्यशाला के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस अवसर पर जिला समन्वयक डॉ. राजेश जोशी, विनोद घिल्डियाल तथा राजकीय इंटर कॉलेज, चिन्यालीसौड़ के प्रधानाचार्य रमेश बंटवाल भी उपस्थित रहे। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

कार्यशाला के दौरान शिक्षकों ने विभिन्न वैज्ञानिक गतिविधियों एवं प्रयोगों में सक्रिय भागीदारी करते हुए अनुभव साझा किए। प्रतिभागियों का कहना था कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम विज्ञान शिक्षण को अधिक प्रभावशाली बनाने के साथ-साथ विद्यार्थियों में जिज्ञासा, तर्कशीलता, नवाचार एवं खोज की भावना विकसित करने में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगे। दो दिवसीय यह कार्यशाला विज्ञान शिक्षा को नई दिशा देने की एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे शिक्षकों की शिक्षण दक्षता में वृद्धि होने के साथ-साथ विद्यालयों में वैज्ञानिक सोच और नवाचार की संस्कृति को भी सुदृढ़ आधार मिलेगा।
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