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June 18, 2026

वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण एवं पर्वतीय जल स्रोत प्रबंधन विषय पर यूकॉस्ट का पैनल डिस्कशन

उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) की ओर से “मां धरा नमन के अंतर्गत जल शिक्षा कार्यक्रम” में “वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण एवं पर्वतीय जल स्रोत प्रबंधन” विषय पर विशेषज्ञ व्याख्यान एवं “पैनल डिस्कशन” का आयोजन परिषद के सभागार में किया गया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

कार्यक्रम में यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत ने कहा कि वर्षा जल संचयन एवं भूजल पुनर्भरण आज की एक प्रमुख आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि परिषद द्वारा इस दिशा में जल स्रोतों के संरक्षण एवं जन जागरूकता व विद्यार्थियों को जोड़ने के उद्देश्य से “मां धरा नमन” कार्यक्रम चलाया जा रहा है। मां धरा नमन के अंतर्गत वाटर एजुकेशन कार्यक्रम चलाया जा रहा है जिससे राज्य के जल संसाधनों का संरक्षण व वैज्ञानिक अध्ययन कम्युनिटी पार्टिसिपेशन के माध्यम से आगे बढ़ाया जाए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

कार्यक्रम संयोजक यूकॉस्ट वैज्ञानिक डॉ भवतोष शर्मा ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए सभी विशेषज्ञों का परिचय कराया एवं बताया कि मानसून पूर्व समय में विशेषज्ञ व्याख्यान के साथ-साथ फील्ड में लगातार जल संरक्षण की दिशा में विशेष कार्य कर रहे विभिन्न जल विशेषज्ञों के विमर्श का आयोजन यूकास्ट द्वारा किया गया है जिससे उनके अनुभवों का लाभ राज्य के विद्यार्थियों एवं आम जनमानस को मिल सके और वह इस दिशा में आगे बढ़ सकें। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

उद्घाटन सत्र में परिषद के संयुक्त निदेशक डॉ डी.पी. उनियाल ने परिषद द्वारा जल संसाधनों के संरक्षण एवं अध्ययन की दिशा में किये जा रहे विभिन्न वैज्ञानिक कार्यक्रमों एवं परियोजनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। प्रथम तकनीकी सत्र में सेंट्रल ग्राउंडवाटर बोर्ड उत्तराखंड क्षेत्र के क्षेत्रीय निदेशक डॉ प्रशांत राय ने वर्षा जल संचयन, भूजल रिचार्ज एवं उत्तराखंड में भूजल प्रबंधन विषय पर अपना मुख्य व्याख्यान देते हुए बताया राज्य के किन-किन स्थानों पर भूजल रिचार्ज का कार्य सफलतापूर्वक किया जा सकता है। साथ ही उन्होंने उत्तराखंड राज्य के विभिन्न पर्वतीय भूभागों एवं मैदानी भागों में भूजल की पूर्व एवं वर्तमान स्थिति के साथ-साथ इन स्थानों पर ग्राउंडवाटर रिचार्ज करने से संबंधित उपयोगी विधियों के बारे में विस्तार से बताया एवं विभिन्न सक्सेस स्टोरीज भी को बताया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

द्वितीय तकनीकी सत्र में आयोजित किए गए पैनल डिस्कशन में विशेषज्ञ के रूप में बोलते हुए प्रो जे.एस. रावत ने बताया कि रिमोट सेंसिंग एवं जी.आई. एस. तकनीकी द्वारा पर्वतीय जल स्रोतों का प्रबंधन किस प्रकार किया जा सकता है। विशेषज्ञ के रूप में बोलते हुए डॉ. जी.सी.एस. नेगी ने कहा कि जल संरक्षण संबंधी कार्यों को कर रही संस्थाएं एक प्लेटफार्म पर आकर कार्य करें तो और अच्छे परिणाम आ सकते हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

उदयपुर राजस्थान के जल स्रोत संरक्षण एवं पुनर्जीवन विशेषज्ञ डॉ अनिल मेहता ने कहा कि जल के प्रति हमें दृष्टिकोण बदलना है और जल को एक “इकोलॉजी सोर्स” के रूप में प्रयोग किया जाना चाहिए, केमिकल आधारित जीवन शैली को घटाना चाहिए, विद्यार्थियों को “लैब से लैंड” की तरफ कार्यों को प्रमुखता देनी चाहिए जिससे हमारे जल स्रोतों का धरातलीय संरक्षण कार्य प्रभावकारी रूप से हो सकेगा। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

तकनीकी सत्र में विषय विशेषज्ञ पर्यावरणविद चंदन नयाल ने बताया कि किस प्रकार विगत एक दशक से अधिक समय में उनके द्वारा उत्तराखंड राज्य के नैनीताल जनपद में स्वयं के प्रयासों एवं सामुदायिक सहभागिता से हजारों चाल, खाल, खंतियां एवं पोखरों का निर्माण कर वर्षा जल को संरक्षित कर भूजल रिचार्ज को बढ़ाया गया है। इससे आसपास के क्षेत्र में न केवल भूजल में वृद्धि हुई है बल्कि उसे क्षेत्र में आग लगने की घटनाओं में भी कमी आई है, आसपास के जलधारों एवं स्प्रिंग्स में डिस्चार्ज की मात्रा बढी है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

पर्यावरणविद् एवं जाड़ी संस्थान उत्तरकाशी, के संस्थापक द्वारिका प्रसाद सेमवाल ने “कल के लिए जल अभियान” के बारे में बताया कि उन्होंने किस प्रकार जनपद में सामुदायिक सहभागिता से हजारों “जल कुंड” का निर्माण कराकर उनमें जल प्रबंधन किया है। हेस्को के भूवैज्ञानिक विनोद खाती ने विगत दो दशकों में राज्य के विभिन्न स्थानों के जलधारों के पुनर्जीवन की दिशा में किए गए कार्यों के बारे में बताते हुए कहा कि गौचर, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, हिमाचल प्रदेश के कुछ स्थानों पर यह कार्य भाभा एटॉमिक रिसर्च इंस्टीट्यूट के साथ मिलकर किया गया है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

पर्यावरणविद् एवं शोध छात्र देव राघवेंद्र बद्री ने अपने संबोधन में बताया कि उन्होंने किस प्रकार रुद्रप्रयाग जनपद के कोटमला क्षेत्र में मिश्रित वनों के विकास के द्वारा जल स्रोतों के संरक्षण की दिशा में सफलता पाई है और सामाजिक सहभागिता से किस प्रकार जल स्रोत संरक्षण कार्यों को आगे बढ़ा रहे हैं। कार्यक्रम के अंत में यूकॉस्ट के वैज्ञानिक डॉ ओम प्रकाश नौटियाल ने कार्यक्रम के विभिन्न सत्रों के निष्कर्ष को प्रस्तुत करते हुए सभी से “मां धरा नमन” कार्यक्रम से जुड़ने एवं जल संरक्षण कार्यो में जुड़ने का आवाहन किया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

कार्यक्रम का संचालन डॉ भवतोष शर्मा द्वारा एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ ओम प्रकाश नौटियाल द्वारा किया गया । कार्यक्रम में यूकास्ट के वैज्ञानिक, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट के स्टाफ, यूकॉस्ट विज्ञान चेतना केंद्र, स्टेम प्रयोगशाला, राज्य के विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थी एवं शिक्षकों सहित लगभग 100 से अधिक प्रतिभागियों द्वारा प्रतिभाग किया गया एवं अपने प्रश्नों का समाधान प्राप्त किया गया।
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Bhanu Bangwal

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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।

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