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July 13, 2026

प्राथमिक शिक्षकों के 2600 पदों में भर्ती प्रक्रिया से वंचित अभ्यर्थियों की याचिका पर हाईकोर्ट ने शिक्षा सचिव को किया तलब

उच्च न्यायालय ने इसी साल टीईटी उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को प्राथमिक शिक्षकों के 2600 से अधिक पदों की भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने की मांग करने वाली जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने शिक्षा सचिव को 22 सितंबर को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने के निर्देश दिए हैं।

उच्च न्यायालय ने इसी साल टीईटी उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को प्राथमिक शिक्षकों के 2600 से अधिक पदों की भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने की मांग करने वाली जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने शिक्षा सचिव को 22 सितंबर को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने के निर्देश दिए हैं।
देहरादून निवासी अनु पंत ने जनहित याचिका दायर कर कहा है कि सी-टीईटी की परीक्षा पांच जुलाई 2020 को होनी थी। कोरोनाकाल के दौरान लगे लॉकडाउन की वजह से परीक्षा 31 जनवरी 2021 को आयोजित की गई और 14 फरवरी को परीक्षा परिणाम घोषित हुआ। याचिकाकर्ता के अनुसार प्रदेश सरकार की ओर से राज्य के दस जिलों में प्राथमिक शिक्षा में सहायक अध्यापक के ढाई हजार से अधिक पदों के लिए अलग-अलग दिवस विज्ञप्ति जारी की गई। याचिकाकर्ता का कहना था कि यदि तय कार्यक्रम के अनुसार जुलाई में परीक्षा होती तो हजारों बेरोजगारों को इन पदों के लिए आवेदन करने की अर्हता प्राप्त हो जाती। समय आगे बढ़ाने के कारण कई आवेदक इसके पात्र नहीं बन पाए। ऐसे में अभ्यर्थियों को आवेदन से वंचित होना पड़ रहा है।
याचिका में इन अभ्यर्थियों को आवेदन के लिए समय देने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अभिजय नेगी के अनुसार इस मामले में पांच अप्रैल को हुई सुनवाई में तत्कालीन शिक्षा सचिव मीनाक्षी सुंदरम ने इन अभ्यर्थियों को शामिल करने का बयान कोर्ट में दिया। हाई कोर्ट की खंडपीठ ने इस मामले से संबंधित समस्त याचिकाओं को कनेक्ट कर दिया था। पहली सितंबर को वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने नियुक्ति प्रक्रिया पर लगी रोक हटा दी।
शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति आरएस चौहान व न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ में याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान महाधिवक्ता एसएन बाबुलकर ने जनहित याचिका के औचित्य पर गंभीर सवाल खड़ा किया। वहीं, याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अभिजय नेगी ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद-38 प्रत्येक नागरिक को समान अवसर प्रदान करता है। लिहाजा इन हजारों बेरोजगार अभ्यर्थियों को नियुक्ति प्रक्रिया में भागीदारी का अवसर मिलना चाहिए। खंडपीठ ने मामले को गंभीरता को लेते हुए शिक्षा सचिव राधिका झा को 22 सितंबर को वीसी के माध्यम से व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने के निर्देश दिए हैं।