कानून हमें आरक्षण दे दो। मेरा प्यारा हिन्दुस्तान, जहां आरक्षण सदाबहार। आजादी के वर्ष बहत्तर, आरक्षण ही खेवनहार। मेरा प्यारा...
Poet
निशांत के लिए शिशिर ऋतु की सीत, ज्यूं जम जाय संसार। ग्रीष्म ऋतु का ताप, उगलता आग आकाश। पावस ऋतु...
रुद्रप्रयाग जिले के वरिष्ठ साहित्यकारों को कलश ट्रस्ट ने अपने आठवें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में सम्मानित किया। कार्यक्रम रुद्रप्रयाग...
यह साल जा रहा है आने वालों के लिए जगह छोड़ता हुआ वह है ही हजारो साल जैसा वक्त की...
संघर्ष ये जो चमक रहा है हमारे नाम का सितारा, कभी हम भी थे बिखरी हुई धूल से। मेरे जानने...
मैं गीत तेरे… सुन मौतजरा थमकर आना…मैं गीततेरे ही गुनता रहा… मैं गीत तेरे ही…सुन मौत जरा… सब गीत तो...
हम भी किसान रहे हैं। सर पर कर्ज़ पीठ पर कोड़ों के निशान रहे हैं।वो उतने पूजे गए जो जितने...
गा लो जैसे मर्जी जितनी मर्जीएकदम सटीक बात है… अपना TIME आएगा… जब अपना TIME आएगा…२तब सबको पता चल जाएगा…२...
कविता दिन-भर थकान जैसी थी और रात में नींद की तरह/ सुबह पूछती हुई, क्या तुमने खाना खाया रात को।...
झंडा दिवस पर कवि सोमवारी लाल सकलानी की कविता- सशस्त्र झंडा दिवस में देखा, महा शौर्य कुर्बानी का लेखा
सशस्त्र झंडा दिवस सशस्त्र झंडा दिवस में देखा, महा शौर्य कुर्बानी का लेखा।शहीदों का इतिहास टटोला, जल थल नभ पराक्रम...
