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September 8, 2026

साहित्य

ज्यू-बुथै हमकु त बस, ज्यू- बुथ्यांणु हुयूं. ऊँ- कु- त, जिकुड़ि जळांणु हुयूं.. रोज भेजिदे, कखड़ि-मुंगर्युं फोटु, दिखै- दिखै हमथैं,...

बेगार हमन त जिंदगी भर, सचम बेगार कायी. अपड़ि जिंदगी, और्यूं पैथर बेकार कायी.. यूंका-ऊंका-सूंका पैथर , कख नि रीटा,...

भ्रमित ‌ मत करो जनता को भ्रमित अपने झूठे वादो को करने से करेंगे काम तुम्हारे लिए सब झूठ वह...

बालिकाये सरल हृदय की होती है बालिका सरस्वती की वाणी होती है, बालिका ही दुर्गा कल्याणी होती है। बालिका को...