कवि सम्मलेन एक दिन मैं बैंठी बैठी क कवि सम्मेलन का बारा म सोचण लग्यूं मैं कबि कवि सम्मेलन म...
साहित्य
झंडा बरदार कै- न- कै पार्टी का, झंडा- बरदार छवा हम. अपड़ौ से बैस- बाजि कना, सरदार छवां हम.. अपड़ौंम...
भू-कानून अपड़ा हक-हकूक कि, आवाज उठौ चल. भू-कानून कू- हक चैंणू, हल्ला- मचौ चल.. चुप रैंण-सैंणा बगत, अब-कब तलक रौलू,...
मानवीय संवेदनाओं से घिरी है बहुत तिरस्कृत हुई है नारी। जब भी उसने कुछ कहना चाहा उसे मान मर्यादा का...
राष्ट्र भाषा हिन्दी जन-गण-मन की अभिलाषा राष्ट्र भाषा हिन्दी, भारत मां के ललाट पर चमकती यह स्वर्ण बिन्दी, भारतीय भाषाएं...
घर जिसमें सब मिलकर रहते उसको कहते है सब घर । जिसमें ताऊ ,चाचा रहते उसको कहते है सब घर।...
छांतु-जांठु-झोळा छांतु- जांठु- झोळा, अज्यूं बि- बच्यूं चा. छांतु-जांठा सार, उंदार-उकाऴ चढ्यूं चा.. घर-गौंम छांतु-जांठु हि रैंद, सारू-उनारू, यूंका भोऽर...
बुलंदी संस्था की ओर से हिंदी पखवाड़े के अंतर्गत चमोली जिले के गोपेश्वर में सुभाष चौक के निकट प्रतीक्षालय में...
जूगनूं नहीं डरता मैं अंधेरे से मैं तो प्रकाश देता सबको एक छोटा-सा उजाला देकर मैं राह दिखाता हूं सबको...
अपणु-बिरणु इनुबि क्या, अपड़ौं से- दूर ह्वे जावा. दुन्यदरी ईं भीड़ म, कखि ख्वे जावा.. ऑसु बि वख अंदी, जख...
