लोगों को सिर्फ क्यों दिखती है शहर की चहल पहल, शानों-शौक़त क्यों किसी को नही दिखती वो कूड़ा बिनती लाचार...
साहित्य
गाड-गदिनु बसगाऴ- बोगदि गाड, गौंक छाल-छाल. कन करद- स्वीस्याट, गौक छाल- छाल.. गदिनु- बड़ि जांद- गाड, रोलि नी- तरेंदि, बगि...
घनन घन घन मेघ बरसे बन संवर कर बिजली चमके आगे पीछे हवा चलती दरवाज़े खिड़कियां भी खनके। घनन..................... बादलों...
वसुन्धरा वसुन्धरा की जलधारा से सारी धरती सजती है कहीं नदियां कहीं तालाब कहीं जलप्रपात घिरते है। सुन्दर वन...
नामदार ऊंची दुकान-फीकू पक्वान, ठिकी ब्वाल कैन. अपड़ि बात- अपड़ि छांच, अफी छ्वाळ कैन.. बड़ा- बड़ा नौं- का पैथर, यथ-...
एक दिन स्वप्न में मैने यमलोक की रहस्यमय घटना देखी। मैंने देखा कि मैं और मेरी दो चार सहेलियों के...
रुतबा व ! रुतबा-मान-सम्मान, अब कख रैगे. कैकि - भलै कु- ऐसान, अब कख रैगे.. तेरु कर्यूं- बोल्यूं , त्वेमक...
आज के हालात.. मक़्कारी आती नहीं हमें रास बड़े बड़े मिले मुझे सलाहकार और उनके हर कदम हैं मेरे खिलाफ...
सिपै-दादा हमरि सान-ईमान-गुमान, तुम छवा सिपै-दादा. बग्त हो-या कुबग्त, देसा-काम अवा सिपै-दादा.. छाति नि झुकि-न झुकलि, कैक अगोड़ि कबि, देश...
श्राद्ध पक्ष श्राद्ध पक्ष लगा आज से पित्रदेव धरती पर आये अपने घर-घर आकर वो सबको आशीष दे जाते। पूर्णिमा...
